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शिवसुब्रमण्यम रमण ने पीएफआरडीए के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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श्री शिवसुब्रमण्यम रमण ने 20 जून 2025 को पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया है। उन्हें भारत सरकार द्वारा 8 अप्रैल, 2025 की अधिसूचना के तहत पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक या अगले आदेशों तक (जो भी पहले हो) के लिए नियुक्त किया गया है।

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श्री रमन 1991 बैच के भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा सेवा (आईए एंड एएस) अधिकारी हैं। पीएफआरडीए में शामिल होने से पहले, उन्होंने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के कार्यालय में उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी के रूप में कार्य किया। उन्होंने पहले भी नेतृत्व के कई पदों पर कार्य किया है, जिसमें भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (एसआईडीबीआई) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा लिमिटेड (एनईसीएल) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी और झारखंड राज्य के प्रधान महालेखाकार शामिल हैं। उन्होंने वर्ष 2006 से 2013 तक मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) और फिर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) में कार्यकारी निदेशक के रूप में भी कार्य किया।

श्री रमन के पास अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री और दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री है। उनके पास कई पेशेवर और शैक्षणिक योग्यताएं भी हैं।  इनमें लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस से वित्तीय विनियमन में एमएससी, एलएलबी, इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस से चीफ डिजिटल ऑफिसर सर्टिफिकेशन, इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनल ऑडिटर्स (आईआईए), फ़्लोरिडा से प्रमाणित आंतरिक लेखा परीक्षक क्रेडेंशियल और सिक्योरिटीज़ लॉ में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा शामिल हैं।

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सार्वजनिक वित्त, प्रौद्योगिकी और वित्तीय विनियमन में अपने विशाल अनुभव के साथ, श्री रमण भारत की पेंशन प्रणाली को मजबूत करने और सभी नागरिकों के लिए सेवानिवृत्ति सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य में पीएफआरडीए का मार्गदर्शन करेंगे।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।