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गठबंधन धर्म न निभाने का आरोप लगाते हुए झामुमो ने बिहार विधानसभा चुनाव न लड़ने का लिया निर्णय

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बड़ा फैसला लेते हुए चुनाव मैदान से खुद को अलग कर लिया है. झारखंड सरकार में मंत्री और गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने रविवार को गिरिडीह में प्रेस वार्ता कर घोषणा की कि पार्टी अब बिहार में एक भी सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारेगी. साथ ही, झामुमो अब बिहार में महागठबंधन के किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार-प्रसार करने नहीं जाएगी.

मंत्री सुदिव्य कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजद और कांग्रेस पर गठबंधन धर्म का पालन न करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि झामुमो ने हमेशा झारखंड में गठबंधन धर्म निभाया और कांग्रेस-राजद को “बड़े भाई” की तरह सम्मान दिया, लेकिन बिहार चुनाव में इन दोनों दलों ने झामुमो के साथ अन्याय और छलावा किया है. उनका कहना था कि बिहार में सीट बंटवारे को लेकर झामुमो को सिर्फ उलझाकर रखा गया, जबकि अंतिम समय में उनके साथ बातचीत भी नहीं की गई.

सुदिव्य कुमार ने कहा कि झारखंड में झामुमो ने गठबंधन की मजबूती के लिए कई त्याग किए. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस और राजद दोनों को पर्याप्त सीटें दीं, यहां तक कि उनके विधायकों को मंत्री पद भी सौंपे गए. इसके बावजूद बिहार चुनाव में झामुमो के लिए कोई सीट नहीं छोड़ी गई. उन्होंने कहा, “हमने गठबंधन धर्म का सम्मान किया, लेकिन कांग्रेस और राजद ने हमें अपमानित किया.”

कुमार ने चेतावनी दी कि बिहार में झामुमो के साथ हुआ यह व्यवहार झारखंड की राजनीति पर भी असर डालेगा. उन्होंने कहा कि झारखंड में कांग्रेस और राजद को जो सम्मान झामुमो ने दिया, अब उस पर पुनर्विचार किया जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि झामुमो अब अपनी रणनीति खुद तय करेगा और आने वाले दिनों में पार्टी इस पर बड़ा फैसला लेगी. सुदिव्य कुमार ने कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि “बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने झामुमो को लेकर कोई स्पष्ट रुख नहीं दिखाया. न तो उन्होंने बातचीत की और न ही किसी तरह की मध्यस्थता की.” उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस और राजद ने बिहार में गठबंधन धर्म की पूरी तरह अनदेखी की है.

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मंत्री ने कहा कि झामुमो अब बिहार चुनाव से दूर रहकर स्थिति का आकलन करेगी और बहुत जल्द आगे की राजनीतिक रणनीति पर निर्णय लेगी. उन्होंने कहा कि बिहार में हुए इस अनुभव से पार्टी ने एक सबक सीखा है कि “गठबंधन तभी टिकता है जब सभी सहयोगी दल समान सम्मान और विश्वास के साथ आगे बढ़ें.”

साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।