शनिवार, सितंबर 19 2026 | 02:11:59 PM

एसजीपीसी कार्यकारिणी ने नामंजूर किया हरजिंदर सिंह धामी का इस्तीफा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चंडीगढ़. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की कार्यकारिणी की आज बैठक हुई। कार्यकारिणी ने प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी (Harjinder Singh Dhami) को अपने इस्तीफा पर पुनर्विचार करने के लिए कहा गया है। कार्यकारिणी के पांच सदस्य एक दो दिन में धामी को मनाने के लिए उनसे मुलाकात करेंगे। पांचों सदस्य धामी को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करेंगे। बता दें कि फिलहाल एसजीपीसी कार्यकारिणी ने धामी के इस्तीफा को पेंडिंग रखा है। बैठक में इस्तीफे के बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है।

17 फरवरी को दिया था इस्तीफा

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की कार्यकारिणी ने एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी (Harjinder Singh Dhami) द्वारा 17 फरवरी को दिए इस्तीफे पर कोई फैसला ना लेते हुए धामी को अपने निर्णय पर पुर्नविचार करने की अपील की है। एसजीपीसी मुख्यालय में आज दो घंटे चली बैठक में कार्यकारिणी ने पांच सदस्यों पर आधारित पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है , उक्त कमेटी अगले एक दो दिन में धामी से होशियारपुर स्थित उनके निवास पर पहुंचकर उन्हें इस्तीफे पर पुर्नविचार करने की अपील करेगी।

5 सदस्यी कमेटी में कौन-कौन है शामिल?

शिष्टमंडल उन्हें दोबारा अपना पद ग्रहण करने की अपील करेगा। कमेटी में जूनियर उपप्रधान बलदेव सिंह कल्याण स बीबी हरजिंदर कौर, हरप्रीत सिंह, सुरजीत सिंह, सुखहरप्रीत सिंह रोडे को शामिल किया गया है। इस कमेटी की अगुवाई एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह करेंगे। मुख्य सचिव कुलवंत सिंह ने बताया कि अगर धामी इस्तीफा वापस लेते हुए एसजीपीसी की कमान फिर से संभालने प्रति असमर्थता जताएंगे तो अगले एक सप्ताह में फिर से कार्यकारिणी बैठक बुलाकर किसी अन्य एसजीपीसी अधिकारी अथवा कार्यकारिणी सदस्य को कार्यकारी प्रधान लगाने पर विचार विमर्श होगा। क्योंकि एसजीपीसी के कामकाज को जारी रखने के लिए और कई अहम फैसलों को लागू करने के लिए प्रधान के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं, इसलिए इस पोस्ट को अधिक समय तक खाली नहीं रखा जा सकता है।

एसजीपीसी के पास है जत्थेदारों को हटाने का अधिकार

उधर, कार्यकारिणी सदस्यों ने बैठक के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह से मुलाकात कर उन्हें सिंह साहिबान को हटाने एवं जांच करने के अधिकार के बारे अवगत करवाया।

- Advertisement -

साभार : दैनिक जागरण

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।