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उत्तर प्रदेश में अब पुलिस की किसी कार्रवाई में नहीं होगा जाति का उल्लेख

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लखनऊ. पुलिस की लिखापढ़ी में अब किसी आरोपी की जाति का कॉलम नहीं भरा जाएगा। एफआईआर में भी इसे रिक्त छोड़ दिया जाएगा। एससी-एसटी एक्ट के मुकदमों को छोड़कर अन्य मामलों में वादी व आरोपित का सरनेम तो लिखा जाएगा पर उनकी जाति का कोई जिक्र नहीं होगा। गिरफ्तारी मेमो में भी आरोपित की जाति नहीं लिखी जाएगी। डीजीपी राजीव कृष्ण का कहना है कि सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) के तहत ऑनलाइन एफआईआर दर्ज किए जाने के प्रोफार्मा से जाति का कॉलम हटाए जाने के लिए एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) को पत्र लिखा गया है। पुलिस दस्तावेजों में जहां जाति दर्ज किए जाने का कॉलम था, वहां अब जाति का उल्लेख न किए जाने का निर्देश है। वहीं, अब वाहनों पर भी जाति नहीं लिखी जा सकेगी।

शासन ने प्रदेश में जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए पुलिस अभिलेखों के साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर जाति के उल्लेख पर रोक लगाई है। मुख्य सचिव दीपक कुमार ने रविवार को इसे लेकर शासनादेश जारी किया था। जिसके अनुरूप जाति का नाम न दर्ज किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार थानों पर अपराधियों की जानकारी रखने के लिए रजिस्टर नंबर चार में आरोपितों की जाति दर्ज की जाती है। इसके अलावा थानों से वरिष्ठ अधिकारियों को मुकदमे व अपराध से जुड़ी रिपोर्ट में भी जाति का उल्लेख रहता है। ऐसे सभी दस्तावेजों में अब जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा। थानों पर हिस्ट्रीशीटर के बोर्ड पर भी उनके नाम के आगे जाति नहीं लिखी जाएगी। इसे लेकर लिखित रूप से भी जल्द विस्तृत निर्देश जारी किए जाएंगे।

शासनादेश के अनुसार, इंटरनेट मीडिया पर भी जाति आधारित कंटेंट नहीं दिए जा सकेंगे। इसकी मॉनीटरिंग भी कराई जाएगी। पुलिस थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों व साइन बोर्ड से जातीय संकेत और जातीय नारे हटाए जाएंगे। प्रदेश में अब जाति आधारित रैलियों भी नहीं होंगी।

साभार : दैनिक जागरण

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