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भारतीय वायुसेना ने किया युद्धाभ्यास, राफेल और सुखोई ने लिया भाग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना के ‘आक्रमण’ से पाकिस्तान डर गया है. राफेल और सुखोई-30 की वॉर ड्रिल से वह टेंशन में आ चुका है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना 48 घंटे से हाई अलर्ट पर है. युद्ध की तैयारी के लिए IAF ने सेंट्रल सेक्टर में युद्धाभ्यास किया. वायुसेना ने इस युद्धाभ्यास को ‘आक्रमण’ नाम दिया है. इस युद्धाभ्यास में टॉप गन पायलट शामिल हैं.

पहलगाम हमले के बाद अलग-अलग एयरबेस पर भारतीय वायुसेना के विमान तैनात हैं. कई एयरबेस से एकसाथ विमान उड़े. आसमान से जमीन पर हमले की ड्रील की गई. राफेल की हाशिमारा और अंबाला स्क्वाड्रन से विमानों ने उड़ान भड़ा. भारतीय एयर डिफेंस यूनिट फ्रंटलाइन पर तैनात हैं. हालांकि, भारतीय वायुसेना का कहना है कि ये रूटीन अभ्यास था.

रेगुलर एक्सरसाइज पर टाइमिंग करती है मैटर

इसका मकसद ये था कि पायलट को कम समय में बड़े मिशन पर कैसे काम करना होगा. इसमें अत्याधुनिक विमानों के द्वारा अभ्यास की जाती है. कहा जा रहा है कि युद्धाभ्यास पहले से प्लान थी. भले ही यह रेगुलर एक्सरसाइज हो लेकिन इसकी टाइमिंग बहुत कुछ कहती है. जिस तरह से पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जो तनाव बना हुआ है, उसके बाद ये युद्धाभ्यास बहुत मैटर करती है.

इस युद्धाभ्यास में राफेल और सुखोई विमान के अलावा मिराज, एस-4 जैसे विमान भी शामिल हैं. राफेल 4.5 जनरेशन का एयरक्राफ्ट का है. यह दुश्मन के बंकर को टारगेट कर सकता है, उनकी टैंक को टारगेट कर सकता है. अगर कोई दुश्मन कहीं पर छिपा है. उस पर अटैक कर सकता है. यह लॉन्ग रेंज ड्रील की गई है. दोनों स्क्वाड्रन को मूव किया गया है, ये बड़ी बात है.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।