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चीन के गांवों में अंतिम संस्कार पर जिनपिंग सरकार के चाबुक के विरोध में बगावत

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बीजिंग. दुनिया में चीन की इमेज एक ऐसे देश की है जहां जनता अपने सरकार की आलोचना नहीं कर सकती, कोई आंदोलन नहीं कर सकती. लेकिन चीन के गांव आजकल अपने हक की आवाज उठा रहे हैं और उनके विरोध-प्रदर्शन में धीरे-धीरे तेजी देखी जा रही है. अब चीन के दक्षिणी गुइझोउ प्रांत में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जो चीन के गांवों में हो रहे प्रदर्शनों में लेटेस्ट है. खास बात है कि चीन के गांवों में पिछले साल की तुलना में विद्रोह की घटनाओं में 70% की वृद्धि देखी गई है. अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर इस गुइझोउ प्रांत में जनता विरोध प्रदर्शन क्यों कर रही है. चलिए बताते हैं.

जनता क्यों कर रही विरोध-प्रदर्शन

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार इस गुइझोउ प्रांत में जनता का विरोध प्रदर्शन स्थानीय अधिकारियों के एक नए नियम बनाने के बाद शिदोंग शहर में सप्ताहांत में शुरू हुआ. अधिकारियों ने नियम बना दिया है कि अब लोगों की मृत्यु के बाद उन्हें दफनाने के बजाय उनका दाह संस्कार किया जाना चाहिए. यानी उन्हें अग्नि के हवाले करना होगा. रिपोर्ट के अनुसार गुइझोउ शेन्जेन और शंघाई के शहरी केंद्रों से दूर एक गरीब, ग्रामीण प्रांत है.

यहां लोग अपने विरोध प्रदर्शन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर भी निशाना साधने से नहीं चूक रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक ग्रामीण को चिल्लाते हुए सुना जा सकता है: “यदि कम्युनिस्ट पार्टी पूर्वजों की कब्रें खोद रही है, तो पहले शी जिनपिंग की पैतृक कब्रों को खोदें”.

लोग यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर सरकार को यह हक किसने दिया कि वह बताए कि हम अपने लोगों का अंतिम संस्कार कैसे कर सकते हैं. इस स्थानीय क्षेत्र में मियाओ जातीयता के लोगों का अनुपात अधिक है. यह एक जातीय अल्पसंख्यक है, जिनकी परंपरा यह है कि मृतक का दाह संस्कार करने के बजाय उसे दफनाया जाना चाहिए. लेकिन अब प्रशासन उन्हें उल्टा करने को कह रहा है.

चीन के गांवों में बढ़ रहे विरोध-प्रदर्शन

चाइना डिसेंट मॉनिटर (सीडीएम), फ्रीडम हाउस द्वारा शुरू किया गया एक प्रोजेक्ट है, जो चीन में हुए किसी भी विरोध-प्रदर्शन पर नजर रखता है. इस साल सीडीएम ने चीन में गांवों के अंदर 661 विरोध प्रदर्शन दर्ज किए हैं, जो पूरे 2024 की तुलना में 70% की वृद्धि है. 2025 की तीसरी तिमाही में, सीडीएम ने अशांति की लगभग 1,400 घटनाएं दर्ज कीं, जो 2024 की इसी अवधि की तुलना में 45% की वृद्धि है.

साभार : एनडीटीवी

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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