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नवरात्रि के दौरान वाराणसी में बंद रहेंगी मांस की दुकानें

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

लखनऊ. चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू हो रहे हैं, जो कि 7 अप्रैल तक रहेंगे. पूरे 9 दिन तक भक्त मां दु्र्गा की आराधना में लीन रहते हैं.भक्तों की आस्था को देखते हुए वाराणसी नगर निगम ने बड़ा आदेश जारी किया है. इस दौरान भगवान शिव की नगरी वाराणसी में मीट की दुकानें नहीं (Varanasi Meat Shop Closed In Navratri) खुलेंगी. वाराणसी नगर कमिश्नर अक्षत वर्मा ने इसे लेकर एक आदेश जारी किया है. उन्होंने कहा है कि नवरात्रि के दौरान वाराणसी में सभी मीट-मांस और मछली की दुकानें बंद रहेगी.

नवरात्रि में मीट की दुकानें रहेंगी बंद

पुलिस अधिकारी ने कहा कि नगर निगम ने नवरात्र में मांस की दुकानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. अगर कोई इस आदेश की अनदेखी करता है तो उस पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि नवरात्रि से हिंदुओं की आस्था जुड़ी है, इसे देखते हुए ही ये फैसला लिया गया है.

‘9 दिन न खुलें मीट-मछली की दुकानें’

बता दें कि नवरात्रि में मांस की दुकानें बंद रहने की मांग दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में भी उठ रही है. झांसी में बीजेपी विधायक रवि शर्मा ने भी मांग की है कि 9 दिन तक मांस की दुकानें नहीं खोली जाएं. नवरात्रि में मीट की दुकानें बंद रहनी चाहिए और मांसाहार का भक्षण बंद होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसे लेकर प्रशासन से बात की जाएगी.

दिल्ली में भी मीट की दुकानें बंद करने की मांग

वहीं गुरुवार को दिल्ली में भी ये मांग उठी. बीजेपी विधायक जरनैल सिंह और त्रिलोकपुरी से बीजेपी विधायक रविकांत उज्जैनवाल समेत कई अन्य नेताओं ने नवरात्रि के दौरान मीट की दुकानें बंद रखे जाने की मांग की. इसे लेकर त्रिलोकपुरी विधायक ने डीसीपी और डीएम को एक चिट्ठी भी लिखी. चिट्ठी में उन्होंने अपील की कि पूरे नवरात्रि में दिल्ली में साफ-सफाई रहे और मीट की दुकानें न खुलें. उन्होंने लिखा, पूरा सनातन समाज मां दुर्गा का उपासक है. नवरात्रि सनातनियों के सबसे पवित्र दिन होते है, ऐसे में मीट की दुकानें न खुलें.’

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30 मार्च से शुरू हो रहे नवरात्रि

बता दें कि नवरात्रि में बहुत से लोग व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा-आराधना करते हैं. ऐसे में मीट की दुकानें देखकर उनका मन खराब हो जाता है. वहीं लोगों का मानना ये भी है कि नवरात्रि के दौरान जीव हत्या नहीं की जानी चाहिए. यही वजह है कि इन पवित्र दिनों में  मांस की दुकानें बंद रखने की मांग की जा रही है.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।