यात्रा में भरपूर सफलता पाने के लिये आपको प्राचीनकाल के ज्योतिषियों, संतों और ऋषियों के बनाये हुये नियमों का सहारा लेना चाहिये जिनके अनुभव से इस बारे में अचूक सिद्धान्तों की रचना हुई है। आपकी जन्मकुण्डली में यदि ऐसे योग मौजूद है जिनके प्रभाव से यात्रा के द्वारा ही आपकी उन्नति होनी है तो सभी समय आपके शुभ मुहूर्त है। यात्रा करते समय चौघड़िया मुहूर्त देख लेना चाहिये, नियम यह है कि जो सांस चल रही है वही पैर यात्रा के लिये पहले आगे बढ़ाना चाहिये। “जेहि सुर चले, वही पग दीजै। काहे को पोथी पत्रा लीजै।।” यात्रा के समय जिन चीजों को देखना शुभ माना गया है- पुष्प, दर्पण, पक्षी, मछली, बछड़े के साथ गाय, तिलकधारी ब्राम्हण, जल भरा घड़ा, फल, दही, नीलकंठ, धोबी, शव, ईख, शराब, पान, दूध, घी, शहद, हाथी, घोड़ा, ध्वज, कन्या, रत्न, गुरु, राजा, कुश, हंस, मोर, बकरी, वाद्य यंत्र।
यात्रा के समय चन्द्रमा का विचार करने से लाभ होता है। सम्मुख चन्द्रमा और दाहिने चन्द्रमा लाभदायक होता है। बायें और पीछे चन्द्रमा हानि देता है। यात्रा के समय राहुकाल का विचार भी किया जाना चाहिए। राहु का वास सम्मुख दिशा में होने पर यात्रा नहीं करनी चाहिए। राहु का वास रविवार को उत्तर में, सोमवार को वायव्य में, मंगलवार को पश्चिम में, बुधवार को नैऋत्य कोण में, गुरूवार को दक्षिण में, शुक्रवार को अग्निकोण, शनिवार को पूर्व दिशा में होता है।
यात्रा के समय योगिनी वास का विचार भी करना चाहिये। योगिनी के बायें और पीठ की ओर होने पर मनोकामना पूरी करती है। दाहिने और सामने होने पर दुख पहुँचाती और कष्ट देती है। योगिनी वास प्रतिपदा को पूर्व दिशा में, द्वितीया को उत्तर में, तृतीया को आग्नेय, चतुर्थी को नैऋत्य, पंचमी को दक्षिण, षष्ठी को पश्चिम, सप्तमी को वायव्य, अष्टमी को ईशान में होता है, नवमी से दिशा का सिलसिला इसी प्रकार दोहराया जाता है।
रविवार को पान खाकर, सोमवार को दर्पण देखकर, मंगलवार को गुड़ खाकर, बुध को धनिया खाकर, बृहस्पतिवार को जीरा खाकर, शुक्रवार को दही खाकर और शनिवार को अदरक खाकर यात्रा करने से कई प्रकार के दोषों का निराकरण हो जाता है। दिन व रात की चौघड़िया के समान ८ भाग करके चर, लाभ, अमृत और शुभ को उपयोग करना चाहिए।
दिन का चौघड़िया (सूर्योदय से सूर्यास्त तक)
| वार | १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
| रवि | उद्वेग | चर | लाभ | अमृत | काल | शुभ | रोग | उद्वेग |
| सोम | अमृत | काल | शुभ | रोग | उद्वेग | चर | लाभ | अमृत |
| मंगल | रोग | उद्वेग | चर | लाभ | अमृत | काल | शुभ | रोग |
| बुध | लाभ | अमृत | काल | शुभ | रोग | उद्वेग | चर | लाभ |
| गुरु | शुभ | रोग | उद्वेग | चर | लाभ | अमृत | काल | शुभ |
| शुक्र | चर | लाभ | अमृत | काल | शुभ | रोग | उद्वेग | चर |
| शनि | काल | शुभ | रोग | उद्वेग | चर | लाभ | अमृत | काल |
रात की चौघड़िया (सूर्यास्त से सूर्योदय तक)
| वार | १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
| रवि | शुभ | अमृत | चर | रोग | काल | लाभ | उद्वेग | शुभ |
| सोम | चर | रोग | काल | लाभ | उद्वेग | शुभ | अमृत | चर |
| मंगल | काल | लाभ | उद्वेग | शुभ | अमृत | चर | रोग | काल |
| बुध | उद्वेग | शुभ | अमृत | चर | रोग | काल | लाभ | उद्वेग |
| गुरु | अमृत | चर | रोग | काल | लाभ | उद्वेग | शुभ | अमृत |
| शुक्र | रोग | काल | लाभ | उद्वेग | शुभ | अमृत | चर | रोग |
| शनि | लाभ | उद्वेग | शुभ | अमृत | चर | रोग | काल | लाभ |
अधिक जानकारी के लिए आप ज्योतिषाचार्य श्याम जी शुक्ल (मो. : 8808797111) से संपर्क कर सकते हैं.
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