रायपुर | शनिवार, 2 मई 2026
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे सुरसाबांधा क्षेत्र में आस्था और अंधविश्वास के घालमेल ने एक 18 वर्षीय युवती की जान ले ली। मानसिक रूप से बीमार बेटी को ठीक करने की आस में एक मां जिस ‘चमत्कारी’ दरवाजे पर पहुंची थी, वहां से उसकी बेटी की अर्थी ही बाहर निकली। विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा की अदालत ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी ईश्वरी साहू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला?
मृतक युवती, योगिता सोनवानी (18), पिछले काफी समय से मानसिक अस्वस्थता से जूझ रही थी। उसका इलाज रायपुर और महासमुंद के प्रतिष्ठित अस्पतालों में चल रहा था। इसी दौरान परिजनों को किसी ने बताया कि सुरसाबांधा निवासी ईश्वरी साहू ‘आयुर्वेदिक’ और ‘ईश्वरीय’ शक्ति से हर बीमारी ठीक कर देती है।
जनवरी 2025 में योगिता की मां, सुनीता सोनवानी, उसे लेकर आरोपी के घर पहुंचीं। आरोपी ने भरोसा दिलाया कि वह योगिता को पूरी तरह ठीक कर देगी, लेकिन इसके लिए उन्हें वहीं रहकर इलाज कराना होगा।
इलाज के नाम पर दी गई तालिबानी यातनाएं
अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों ने रोंगटे खड़े कर दिए। आरोपी महिला इलाज के नाम पर योगिता के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर रही थी:
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शारीरिक प्रहार: आरोपी युवती के शरीर पर चढ़कर उसे अपने पैरों से कुचलती थी।
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खौलता पानी और तेल: कथित ‘चमत्कारी तेल’ और गर्म पानी को युवती के शरीर पर डाला जाता था।
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धार्मिक दबाव: पीड़िता को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी और उसे ईसा मसीह की प्रार्थना करने के लिए मजबूर किया जाता था।
जबरन धर्मांतरण का खुलासा
पुलिस जांच और अदालती कार्यवाही में यह स्पष्ट हुआ कि यह केवल अंधविश्वास का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे धर्मांतरण का एजेंडा भी था। आरोपी ईश्वरी साहू पीड़िता और उसकी मां पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाती थी। उनसे कहा गया था कि पूर्णतः स्वस्थ होने के बाद उन्हें अपना धर्म बदलना ही होगा। साथ ही, ‘प्रभु ईशु’ के नाराज होने का डर दिखाकर उन्हें किसी को कुछ भी बताने से रोका गया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली पोल
22 मई 2025 को जब योगिता की मौत हुई, तो आरोपी ने इसे प्राकृतिक मौत बताने की कोशिश की। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए:
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युवती की पसलियां टूटी हुई पाई गईं।
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अंदरूनी अंगों में गंभीर चोट के कारण दम घुटने से मौत हुई।
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डॉक्टरों ने इसे स्पष्ट रूप से ‘Homicidal’ (हत्यात्मक) श्रेणी में रखा।
अदालत का फैसला और सजा
न्यायालय ने माना कि आरोपी ने बिना किसी डॉक्टरी डिग्री या ज्ञान के झाड़-फूंक और हिंसक तरीकों का सहारा लिया, जो सीधे तौर पर हत्या की श्रेणी में आता है। अदालत ने आरोपी ईश्वरी साहू को निम्नलिखित धाराओं में सजा सुनाई:
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भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 105 और SC/ST एक्ट: आजीवन कारावास।
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छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम: 1 वर्ष का कारावास।
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छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम: 1 वर्ष का कारावास।
Matribhumisamachar


