रांची. झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में कथित तौर पर ईसाई मिशनरियों द्वारा कराए जा रहे धर्मांतरण के मुद्दे ने एक नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। इस संवेदनशील विषय पर ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रही महिला पत्रकार सुभी कर्मा को अब कानूनी कार्रवाई और FIR की धमकी का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
पत्रकार सुभी कर्मा पिछले कुछ समय से झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं। अपनी रिपोर्ट्स में उन्होंने दावा किया कि कई क्षेत्रों में मिशनरियों द्वारा प्रलोभन या अन्य माध्यमों से आदिवासियों का धर्मांतरण कराया जा रहा है। उन्होंने स्थानीय निवासियों के साक्षात्कार और जमीनी हकीकत दिखाते हुए कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए थे।
इन रिपोर्ट्स के वायरल होने के बाद, सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। JMM नेताओं का आरोप है कि यह रिपोर्टिंग भ्रामक है और समाज में वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से की जा रही है।
JMM नेता की चेतावनी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बहस तब बढ़ गई जब JMM के एक प्रमुख नेता ने सुभी कर्मा की रिपोर्टिंग को “सांप्रदायिक एजेंडा” करार दिया। नेता ने स्पष्ट रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि झूठी खबरें फैलाकर राज्य का माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और पत्रकार के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी।
पत्रकार का पक्ष
धमकी मिलने के बाद सुभी कर्मा ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि वे केवल वही दिखा रही हैं जो उन्होंने जमीन पर देखा है। उन्होंने तर्क दिया कि आदिवासी संस्कृति और उनकी पहचान को बचाने के लिए सच दिखाना जरूरी है। इस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी और पत्रकारिता के अधिकारों को लेकर बहस छिड़ गई है।
राजनीतिक गरमाहट
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि अगर कोई पत्रकार ग्राउंड पर जाकर सच्चाई दिखा रहा है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का डर दिखाना लोकतंत्र के खिलाफ है। वहीं, राज्य सरकार का रुख है कि किसी भी प्रकार की “फेक न्यूज” या समाज को बांटने वाली सामग्री पर कानून अपना काम करेगा।
गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस मामले में सुभी कर्मा का बचाव करते हुए ट्वीट किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में धर्मांतरण एक कड़वा सच है और हेमंत सोरेन सरकार सच को दबाने के लिए पत्रकारों को निशाना बना रही है।
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