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ड्राइविंग लाइसेंस प्वाइंट्स सिस्टम: अब ट्रैफिक नियम तोड़ा तो रद्द होगा लाइसेंस, जानें नए नियम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. भारत की सड़कों को सुरक्षित बनाने और बेलगाम ड्राइविंग पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार एक ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी में है। देश में बढ़ते सड़क हादसों के मद्देनजर, सरकार जल्द ही ‘प्वाइंट्स आधारित ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम’ लागू कर सकती है। इस नए सिस्टम के तहत अब ट्रैफिक नियम तोड़ना न केवल जेब पर भारी पड़ेगा, बल्कि ड्राइवर का लाइसेंस रद्द होने का खतरा भी बना रहेगा।

क्या है ‘प्वाइंट्स सिस्टम’ और कैसे करेगा काम?

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, प्रत्येक ड्राइविंग लाइसेंस धारक को एक निश्चित डिजिटल ‘क्रेडिट प्वाइंट्स’ दिए जाएंगे। नियम तोड़ने पर ये प्वाइंट्स घटते जाएंगे:

  • प्वाइंट्स की कटौती: ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप करना या गलत दिशा में वाहन चलाने पर लाइसेंस से अंक काट लिए जाएंगे।

  • अस्थायी निलंबन: यदि एक निश्चित समय सीमा के भीतर प्वाइंट्स एक तय स्तर से नीचे गिरते हैं, तो लाइसेंस को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया जाएगा।

  • लाइसेंस रद्दीकरण: बार-बार गंभीर उल्लंघन करने और शून्य प्वाइंट्स होने की स्थिति में लाइसेंस को हमेशा के लिए रद्द (Cancel) किया जा सकता है।

100 ‘डेथ जोन’ जिलों पर विशेष नजर

सरकार ने डेटा के आधार पर देशभर के 100 सबसे खतरनाक जिलों की पहचान की है, जहां दुर्घटना दर सबसे अधिक है। इन जिलों के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है:

  1. सड़कों के ‘ब्लैक स्पॉट्स’ (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) को इंजीनियरिंग के जरिए ठीक किया जाएगा।

  2. ई-चालान और सीसीटीवी निगरानी को पहले से ज्यादा सख्त बनाया जाएगा।

  3. स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सड़क सुरक्षा के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह बनाया जाएगा।

हादसों का कड़वा सच

भारत में हर साल लगभग 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें करीब 1.5 लाख से अधिक लोग अपनी जान गंवा देते हैं। चिंता की बात यह है कि मरने वालों में 72% लोग 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारी जुर्माने के बावजूद लोगों के व्यवहार में बदलाव नहीं आया है, इसलिए ‘लाइसेंस खोने का डर’ ही सड़क पर अनुशासन ला सकता है।

भारत में सड़क सुरक्षा और नए यातायात नियमों के बारे में और पढ़ें

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।