नई दिल्ली । शनिवार, 4 जुलाई 2026
भारत और इज़राइल के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को एक ऐतिहासिक और नई मजबूती देते हुए द्विपक्षीय निवेश समझौता (Bilateral Investment Agreement – BIA) आज, 4 जुलाई 2026 (शनिवार) से आधिकारिक रूप से पूरे देश में लागू हो गया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच सीमा-पार निवेश (Cross-Border Investments) को बढ़ावा देने, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की सुरक्षा सुनिश्चित करने और एक पारदर्शी, सुरक्षित एवं अत्यधिक पूर्वानुमानित निवेश वातावरण तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
इस ऐतिहासिक समझौते पर 8 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में भारत गणराज्य की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इज़राइल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच के बीच द्विपक्षीय बैठक के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। अब इसके पूरी तरह प्रभावी होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक और तकनीकी गलियारे को एक नया जीवन मिला है।
क्या है भारत-इज़राइल द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA)?
द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) या द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) दो संप्रभु देशों के बीच हस्ताक्षरित एक ऐसा कानूनी ढांचा है, जो एक-दूसरे के देश में काम कर रहे निवेशकों को निष्पक्ष व्यवहार, सुरक्षा और कानूनी निश्चितता की गारंटी देता है।
भारत और इज़राइल के बीच लागू हुआ यह नया समझौता भारत के ‘2016 मॉडल बीआईटी’ (Model BIT Text) के सख्त और आधुनिक अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून के सिद्धांतों पर आधारित है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इज़राइल दुनिया के विकसित देशों के समूह OECD (आर्थिक सहयोग और विकास संगठन) का पहला ऐसा सदस्य देश बन गया है, जिसने भारत के इस नए संशोधित मॉडल ढांचे के तहत इस रणनीतिक समझौते पर मुहर लगाई है। यह समझौता दोनों देशों के बीच पूर्व में हुए वर्ष 1996 के पुराने समझौते का स्थान लेगा, जिसे भारत ने अपनी निवेश नीति की समीक्षा के तहत 2017 में समाप्त कर दिया था।
समझौते की प्रमुख विशेषताएं: क्यों है यह ऐतिहासिक?
भारत-इज़राइल BIA केवल निवेश की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक निवेश मानकों और विकसित न्यायशास्त्र (Jurisprudence) के अनुरूप संतुलित है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
-
समान और निष्पक्ष व्यवहार: दोनों देशों के निवेशकों को बिना किसी भेदभाव के न्यूनतम मानक उपचार (Minimum Standard of Treatment) की गारंटी मिलेगी।
-
जब्ती के खिलाफ सुरक्षा (Safeguards against Expropriation): किसी भी निवेशक की संपत्ति का अवैध राष्ट्रीयकरण या जब्ती नहीं की जा सकेगी। यदि सार्वजनिक हित में ऐसा किया जाता है, तो उसके लिए त्वरित, पर्याप्त और प्रभावी मुआवजे का कड़ा प्रावधान है।
-
स्वतंत्र मध्यस्थता तंत्र (Independent Arbitration): यदि किसी निवेशक और सरकार के बीच विवाद होता है, तो उसे निपटाने के लिए एक पारदर्शी और स्वतंत्र विवाद समाधान तंत्र की व्यवस्था की गई है। इसमें अंतरराष्ट्रीय पंचाट (Arbitration) में जाने से पहले घरेलू अदालतों में कानूनी उपायों को आजमाने के लिए 3 वर्ष की समय-सीमा तय की गई है।
-
पूंजी का निर्बाध हस्तांतरण: दोनों देशों की कंपनियां अपने मुनाफे, लाभांश और पूंजी को आसानी से बिना किसी बाधा के एक-दूसरे के देश में स्थानांतरित कर सकेंगी।
इन 8 प्रमुख क्षेत्रों में दिखेगा ऐतिहासिक उछाल
भारत और इज़राइल के बीच वर्तमान में सालाना द्विपक्षीय व्यापार लगभग 4 अरब डॉलर (करीब 35,212 करोड़ रुपये) का है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस BIA के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच लगभग 800 मिलियन डॉलर के मौजूदा आपसी निवेश में भारी बढ़ोतरी होगी। विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा:
-
रक्षा एवं रक्षा प्रौद्योगिकी: ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इज़राइली तकनीक का भारत में सह-उत्पादन।
-
कृषि एवं एग्री-टेक: पानी की कमी से निपटने वाली इज़राइली ड्रिप इरिगेशन तकनीक का भारतीय खेतों में विस्तार।
-
फिनटेक और डिजिटल भुगतान: दोनों देशों के डिजिटल भुगतान प्रणालियों में कनेक्टिविटी का विकास।
-
साइबर सुरक्षा: वैश्विक स्तर पर मजबूत बुनियादी ढांचे के लिए संयुक्त सुरक्षा चक्र का निर्माण।
-
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और स्टार्टअप: इज़राइल (जिसे ‘स्टार्टअप नेशन’ कहा जाता है) और भारत के विशाल टेक टैलेंट पूल का महामिलन।
-
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा तकनीक: अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक टूल्स और लाइफ-सेविंग मेडिकल डिवाइस का निर्माण।
-
जल प्रबंधन: खारे पानी को पीने योग्य बनाने (Desalination) और जल शोधन तकनीकों का आदान-प्रदान।
-
उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing): भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में इज़राइली पूंजी का सहयोग।
सरकार के संप्रभु अधिकारों और नीतिगत स्वतंत्रता का संतुलन
इस समझौते की सबसे बड़ी खूबी इसका नीतिगत संतुलन (Sovereign Policy Space) है। पूर्व में कई बार अंतरराष्ट्रीय संधियों के कारण सरकारों के हाथ बंध जाते थे, लेकिन इस BIA के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि निवेश संरक्षण के साथ-साथ भारत और इज़राइल दोनों ही सरकारों को अपने नागरिकों के हित में फैसले लेने का पूरा अधिकार होगा।
सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health), पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection), राष्ट्रीय सुरक्षा और कराधान (Taxation) जैसे संवेदनशील मामलों में दोनों देश पूरी तरह स्वतंत्र होकर नीतिगत निर्णय ले सकेंगे। यह प्रावधान देश की संप्रभुता और विदेशी पूंजी निवेश के हितों के बीच एक आदर्श संतुलन कायम करता है।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
4 जुलाई 2026 से प्रभावी हुआ भारत-इज़राइल द्विपक्षीय निवेश समझौता केवल एक आर्थिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच आगामी मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) के लिए एक मजबूत नींव की तरह काम करेगा। यह दोनों गतिशील लोकतंत्रों को न केवल व्यापारिक रूप से जोड़ेगा, बल्कि एशिया-प्रशांत और मध्य-पूर्व के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भी एक नई मजबूती प्रदान करेगा।
Matribhumisamachar


