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ऑपरेशन एपिक फ्युरी: सीनेट में ट्रंप की जीत, ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने को मिली मंजूरी

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस से बयान देते हुए (ऑपरेशन एपिक फ्युरी)

वाशिंगटन. अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध के बीच जो बाइडन प्रशासन के बाद सत्ता में लौटे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ी राजनीतिक जीत मिली है। अमेरिकी सीनेट ने उस द्विदलीय प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जो ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ (Operation Epic Fury) को सीमित करने के लिए लाया गया था।

मुख्य घटनाक्रम: सीनेट में मतदान

डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन और रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल द्वारा पेश किए गए इस ‘वार पावर्स रिजॉल्यूशन’ के पक्ष में 47 और विरोध में 53 मत पड़े।

  • रिपब्लिकन एकजुटता: सीनेट में रिपब्लिकन बहुमत ने राष्ट्रपति ट्रंप के युद्ध संबंधी विशेषाधिकारों का समर्थन किया।

  • विपक्ष का तर्क: डेमोक्रेट्स का आरोप है कि ट्रंप ने कांग्रेस की अनुमति के बिना युद्ध शुरू कर संवैधानिक मर्यादाओं को तोड़ा है। सीनेटर टिम केन ने कहा, “प्रशासन ने यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दिए कि अमेरिका पर ईरान से कोई ‘तत्काल खतरा’ था।”

युद्ध के मोर्चे से बड़ी खबरें

यह राजनीतिक घटनाक्रम तब हो रहा है जब मध्य पूर्व में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है:

  1. ईरानी नेतृत्व को भारी नुकसान: हालिया अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडरों के मारे जाने की खबरें हैं। तेहरान में सत्ता का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।

  2. अमेरिकी हताहत: ईरान के जवाबी हमले में कुवैत के पोर्ट शुआईबा स्थित अमेरिकी बेस पर 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई है।

  3. मिसाइल क्षमता पर प्रहार: राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी वायुसेना ने ईरान की 70% से अधिक बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट कर दिया है।

ट्रंप का कड़ा रुख: “हम रुकेंगे नहीं”

व्हाइट हाउस से जारी बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान की परमाणु और मिसाइल शक्ति पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती। ट्रंप ने कहा:

“अमेरिका और इजरायल इस समय दुनिया की सबसे मजबूत स्थिति में हैं। हम ईरान को दोबारा सिर उठाने का मौका नहीं देंगे। हमारी सेनाएं बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।”

वैश्विक प्रभाव और चिंता

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचा, तो:

  • ऊर्जा संकट: फारस की खाड़ी में तेल की आपूर्ति ठप होने से वैश्विक तेल कीमतें $150 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

  • क्षेत्रीय अस्थिरता: सऊदी अरब और यूएई भी ईरानी मिसाइलों के निशाने पर हैं, जिससे पूरे अरब प्रायद्वीप में शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है।

पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें: मातृभूमि समाचार – अंतरराष्ट्रीय ताज़ा खबरें

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