वाशिंगटन. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच युद्ध रणनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका ने ईरान के घातक ‘शहीद’ (Shahed) ड्रोन की काट ढूंढते हुए अपना नया कम लागत वाला आत्मघाती ड्रोन ‘लुकास’ (Lucas) युद्ध क्षेत्र में तैनात कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने यह कदम ईरान की ‘रिवर्स इंजीनियरिंग’ तकनीक का मुकाबला करने के लिए उठाया है।
शहीद की तर्ज पर ‘मेड इन अमेरिका’ तकनीक
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने यूक्रेन और मध्य पूर्व में ईरान निर्मित शहीद-136 ड्रोन की प्रभावशीलता का गहरा अध्ययन किया है। इसी तकनीक को आधार बनाकर Lucas (Low-cost Uncrewed Combat Attack System) विकसित किया गया है। यह ड्रोन भी शहीद की तरह ‘कामीकाजे’ (आत्मघाती) मोड पर काम करता है, जो लक्ष्य के ऊपर मंडराने के बाद सीधे टकराकर विस्फोट करता है।
लुकास ड्रोन की मुख्य ताकत
जहाँ ईरानी ड्रोन अपनी मारक क्षमता के लिए जाने जाते हैं, वहीं अमेरिकी ‘लुकास’ इसे आधुनिक तकनीक से और अधिक घातक बनाता है:
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सस्ती लागत: मात्र 35,000 डॉलर (लगभग 29 लाख रुपये) की लागत, जो महंगे मिसाइल सिस्टम की तुलना में बेहद कम है।
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स्मार्ट नेविगेशन: इसमें हाई-रेजोल्यूशन कैमरा और सैटेलाइट कनेक्टिविटी दी गई है।
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मिड-एयर कंट्रोल: उड़ान के दौरान भी इसका लक्ष्य बदला जा सकता है, जो इसे पारंपरिक ड्रोन से अलग बनाता है।
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लॉन्च क्षमता: इसे समुद्र और जमीन दोनों जगहों से आसानी से लॉन्च किया जा सकता है।
‘ड्रोन डोमिनेंस’ और भविष्य की रणनीति
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 28 फरवरी को इसके पहले सफल युद्धक इस्तेमाल की पुष्टि की है। अमेरिका की योजना 2028 तक 3.4 लाख ऐसे सस्ते ड्रोन तैयार करने की है।
अब युद्ध महंगे लड़ाकू विमानों से हटकर ‘स्वार्म तकनीक’ (सैकड़ों ड्रोन का एक साथ हमला) की ओर बढ़ रहा है। लुकास जैसे ड्रोन न केवल दुश्मन के ठिकानों को तबाह करेंगे, बल्कि उनके महंगे रडार सिस्टम को भी भ्रमित कर देंगे।
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