काबुल । मंगलवार, 5 मई 2026
हाल के महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में आई कड़वाहट थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार, 4 मई को पूर्वी अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में हुए ताजा हमलों ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
ताजा घटनाक्रम और नुकसान
अफगान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत के अनुसार, पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए इन हमलों में आम नागरिकों को निशाना बनाया गया। इस गोलाबारी में:
-
3 नागरिकों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हुए हैं।
-
सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है, जिसमें दो स्कूल, दो मस्जिदें और एक स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह तबाह हो गए हैं।
संघर्ष की जड़ें: आरोप-प्रत्यारोप का दौर
पाकिस्तान का लंबे समय से यह आरोप रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकवादी अफगान धरती का उपयोग पाकिस्तान में हमले करने के लिए कर रहे हैं। हालांकि, अफगान तालिबान इन दावों को सिरे से खारिज करता रहा है। फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह घातक सिलसिला अब तक सैकड़ों जान ले चुका है।
शांति वार्ता और जमीनी हकीकत
दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल की शुरुआत में चीन की मध्यस्थता में उरुमची में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता हुई थी। चीन ने दावा किया था कि दोनों पक्ष संघर्ष न बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। लेकिन सोमवार की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कूटनीतिक मेज पर हुए समझौते सीमा पर लागू नहीं हो पा रहे हैं।
स्पष्टीकरण
-
TTP बनाम अफगान तालिबान: अक्सर लोग इन्हें एक ही समझते हैं, लेकिन ये दो अलग संगठन हैं। अफगान तालिबान अफगानिस्तान पर शासन करता है, जबकि TTP पाकिस्तान सरकार के खिलाफ लड़ रहा है।
-
चीन की भूमिका: उरुमची वार्ता का मुख्य उद्देश्य CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, क्योंकि सीमा पर अस्थिरता चीन के निवेश के लिए खतरा है।
Matribhumisamachar


