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होर्मुज जलडमरूमध्य से फिर शुरू होगी जहाजों की आमद: ईरान और अमेरिका के बीच समझौते की सुगबुगाहट

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का मानचित्र और वहां से गुजरते हुए बड़े तेल टैंकर जहाज, जो वैश्विक ईंधन आपूर्ति को दर्शाते हैं।

तेहरान | रविवार, 24 मई 2026 

वैश्विक ऊर्जा बाजार और आर्थिक मंदी से जूझ रही दुनिया के लिए एक बड़ी और बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम (Tasnim News Agency) के अनुसार, पिछले कुछ समय से जारी सैन्य संघर्ष के बाद अब ईरान और अमेरिका के बीच एक शुरुआती सहमति (MoU) बनती दिख रही है।

इस संभावित समझौते के तहत सबसे बड़ा ऐलान यह है कि अगले 30 दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की तादाद फिर से युद्ध-पूर्व स्तर (Pre-war levels) पर लौट सकती है

वैश्विक लाइफलाइन पर लगा था ब्रेक

इस साल 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच भड़के संघर्ष के बाद से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर गंभीर प्रतिबंध लग गए थे। युद्ध से पहले जहाँ इस रास्ते से रोजाना 125 से 140 वाणिज्यिक जहाज गुजरते थे, वहीं जंग के दौरान यह ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया था। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी कर दी थी, तो वहीं ईरान ने इस रणनीतिक रास्ते पर अपना कड़ा नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इसके चलते पूरी दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई और वैश्विक ईंधन संकट खड़ा हो गया।

पश्चिमी मीडिया के दावों पर ईरान का बयान

हालाँकि, ईरान ने इस समझौते की शर्तों को लेकर दुनिया के सामने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। पश्चिमी मीडिया में चल रही उन रिपोर्ट्स को तसनीम समाचार एजेंसी ने पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि होर्मुज में हालात 100% पहले जैसे सामान्य होने जा रहे हैं।

ईरान ने साफ किया है कि:

  • सीमित दायरा: इस संभावित समझौते का दायरा फिलहाल सीमित है।

  • संपूर्ण बहाली नहीं: ‘होर्मुज की स्थिति’ पूरी तरह से युद्ध से पहले जैसी नहीं होगी, बल्कि केवल जहाजों के यातायात (Shipping Traffic) को 30 दिनों के भीतर पुराने स्तर पर लाया जाएगा।

  • ईरानी संप्रभुता: ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर विभिन्न माध्यमों से अपनी संप्रभुता और निगरानी बनाए रखेगा।

  • परमाणु मुद्दा अलग: इस शुरुआती समझौते में ईरान के समृद्ध यूरेनियम या परमाणु कार्यक्रम को शामिल नहीं किया गया है, उस पर कूटनीतिक बातचीत आगे भी (60 दिनों की समय सीमा के तहत) जारी रहेगी।

पर्दे के पीछे क्या है डील?

ताज़ा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, यह समझौता एक ‘गिव एंड टेक’ (लेन-देन) नीति पर आधारित है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • नाकाबंदी और माइंस का हटना: ईरान होर्मुज क्षेत्र में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को हटाएगा। इसके बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाएगा।

  • तेल बेचने की आजादी: अमेरिका वार्ता के दौरान ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में आंशिक छूट देगा, जिससे तेहरान बिना रुकावट के तेल बेच सकेगा।

  • फ्रीज संपत्तियों की बहाली: ईरान की विदेशों में फंसी (Freeze) संपत्तियों का एक हिस्सा तुरंत जारी किया जाएगा।

  • सभी मोर्चों पर शांति: इस समझौते के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर शत्रुता समाप्त करने पर जोर दिया गया है, यानी हिज़्बुल्लाह और इज़राइल के बीच भी युद्धविराम लागू होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति और भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिए हैं कि अगले कुछ घंटों में होर्मुज को लेकर दुनिया को एक बड़ा और अंतिम आधिकारिक ब्रेकथ्रू देखने को मिल सकता है।

संपादकीय टिप्पणी: हालांकि यह 60 दिनों का एक अस्थायी युद्धविराम समझौता ज्ञापन (MoU) होने जा रहा है, लेकिन अगर यह सफल रहता है, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे भारत सहित तमाम विकासशील देशों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।

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