काराकास. वेनेजुएला के तट पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। एक रूसी तेल टैंकर, जिसे अमेरिकी कोस्ट गार्ड और नौसेना ने घेरने की कोशिश की, अब दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देशों के बीच सीधे टकराव का केंद्र बन गया है।
हाथापाई और समुद्र में पीछा (High-Seas Chase)
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी कोस्ट गार्ड पिछले कई दिनों से ‘बेला-1’ (Bella 1) नामक एक तेल टैंकर का पीछा कर रही थी। अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज ‘डार्क फ्लीट’ (Shadow Fleet) का हिस्सा है जो प्रतिबंधों का उल्लंघन कर अवैध तेल की सप्लाई कर रहा है।
तनाव तब और बढ़ गया जब दिसंबर के अंत में अमेरिकी अधिकारियों ने इस जहाज पर जबरन बोर्डिंग (कब्जा) करने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इस दौरान जहाज के चालक दल और अमेरिकी टीम के बीच तीखी बहस और हाथापाई जैसी स्थिति पैदा हो गई। चालक दल ने हार मानने के बजाय जहाज पर रूस का झंडा पेंट कर दिया और रातों-रात इसका नाम बदलकर ‘मैरिनेरा’ (Marinera) कर दिया, ताकि इसे रूसी संप्रभुता का कवच मिल सके।
पुतिन का कड़ा एक्शन: भेजी सबमरीन
अपने जहाज को अमेरिकी घेरे में फंसा देख रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कड़ा रुख अपनाया है। रूस ने इस खाली टैंकर को एस्कॉर्ट करने के लिए परमाणु पनडुब्बी और युद्धपोत रवाना कर दिए हैं। रूसी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अपने नागरिक जहाजों के खिलाफ किसी भी “समुद्री डकैती” (Piracy) को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
अमेरिका की ‘ऑपरेशन रिजॉल्व’ और मादुरो की गिरफ्तारी
यह समुद्र का तनाव तब और भड़क गया जब 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया। अमेरिका ने मादुरो पर ‘नार्को-टेररिज्म’ का आरोप लगाया है और उन्हें न्यूयॉर्क ले जाया गया है।
मुख्य बिंदु:
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रूसी चुनौती: पुतिन ने वेनेजुएला के पास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर ट्रंप प्रशासन को सीधा संदेश दिया है।
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चीन और रूस की नाराजगी: दोनों देशों ने मादुरो की गिरफ्तारी को ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ और ‘अपहरण’ करार दिया है।
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युद्ध की आशंका: अमेरिकी साउदर्न कमांड ने कहा है कि वे क्षेत्र से गुजरने वाले किसी भी प्रतिबंधित जहाज के खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
वेनेजुएला संकट को लेकर रूस और चीन की संयुक्त सैन्य और कूटनीतिक हलचल तेज
महाशक्तियों का टकराव: वेनेजुएला में रूस-चीन की ‘ज्वाइंट घेराबंदी’, वॉशिंगटन को सीधी चुनौती
वेनेजुएला के तट पर अमेरिकी नौसेना द्वारा रूसी जहाज को घेरे जाने और राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, रूस और चीन ने एक अभूतपूर्व मोर्चा खोल दिया है। दोनों देशों ने इसे केवल एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि अमेरिका की “साम्राज्यवादी दादागिरी” करार दिया है।
रूसी सैन्य ‘मसल फ्लेक्सिंग’: पनडुब्बियों का जाल
क्रेमलिन के आदेश पर, रूस ने अपनी घातक ‘यासेन-एम’ (Yasen-M) श्रेणी की परमाणु पनडुब्बी और अटलांटिक बेड़े के दो विध्वंसक जहाजों (Destroyers) को कैरिबियन सागर की ओर मोड़ दिया है।
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पुतिन का संदेश: रूसी रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि, “वेनेजुएला के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हमारे जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘घातक बल’ (Deadly Force) के इस्तेमाल से भी गुरेज़ नहीं किया जाएगा।” रूसी अधिकारियों का कहना है कि हाथापाई की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका कूटनीति की भाषा भूल चुका है।
चीन की ‘ड्रैगन’ चाल: आर्थिक और सैन्य बैकअप
चीन, जो वेनेजुएला का सबसे बड़ा कर्जदाता है, ने इस बार कड़ा रुख अपनाया है।
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नौसैनिक युद्धाभ्यास की आहट: बीजिंग ने संकेत दिए हैं कि वह क्षेत्र में रूस के साथ एक ‘आकस्मिक’ नौसैनिक अभ्यास कर सकता है।
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खुफिया सहयोग: रिपोर्ट्स बताती हैं कि चीन अपने सैटेलाइट नेटवर्क और टोही विमानों के जरिए वेनेजुएला के तट पर अमेरिकी जहाजों की लोकेशन का डेटा रूस के साथ साझा कर रहा है। चीन का कहना है कि वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय कानून का ‘अपहरण’ है।
‘लाल रेखा’ और शीत युद्ध की वापसी
रूस और चीन ने एक संयुक्त बयान में वॉशिंगटन को चेतावनी दी है कि:
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तख्तापलट का विरोध: वेनेजुएला में किसी भी ‘कठपुतली सरकार’ को मान्यता नहीं दी जाएगी।
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रसद और सुरक्षा: रूस ने काराकास (वेनेजुएला की राजधानी) के पास अपने ‘वैगनर ग्रुप’ जैसे निजी सैन्य ठेकेदारों की मौजूदगी बढ़ा दी है ताकि महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जा सके, जिन पर चीन का भी आर्थिक हित है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और ‘साउदर्न कमांड’ अलर्ट
इस संयुक्त मोर्चे को देखते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने अपनी ‘साउदर्न कमांड’ को हाई अलर्ट पर रखा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे परमाणु शक्ति संपन्न देशों के साथ सीधे संघर्ष से बचना चाहते हैं।
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