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कानपुर: एलिवेटेड रोड के फेर में फंसा झकरकटी बस अड्डे का भविष्य, शिफ्टिंग की योजना अब भी अधर में

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर. शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण शहीद मेजर सलमान खान बस अड्डे (झकरकटी) को शिफ्ट करने की योजना एक बार फिर ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। झकरकटी बस अड्डे पर दबाव कम करने के लिए इसे नौबस्ता या अन्य प्रस्तावित स्थानों पर शिफ्ट किया जाना था, लेकिन एलिवेटेड रोड के रैंप निर्माण की तकनीकी बाधाओं ने पूरी प्रक्रिया को लटका दिया है।

रैंप निर्माण बना मुख्य बाधा

योजना के मुताबिक, झकरकटी बस अड्डे के पास से गुजरने वाली एलिवेटेड रोड के रैंप का निर्माण होना है। इस रैंप के डिजाइन और एलाइनमेंट को लेकर परिवहन विभाग और निर्माणदायी संस्थाओं के बीच अभी तक पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है। जब तक रैंप का निर्माण स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक बस अड्डे के प्रवेश और निकास द्वार की स्थिति तय करना मुश्किल हो रहा है।

यात्रियों और परिवहन विभाग की बढ़ी मुश्किलें

बस अड्डे की शिफ्टिंग में हो रही देरी का सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है:

  • जाम की समस्या: झकरकटी के आसपास दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानी होती है।

  • सुविधाओं का अभाव: शिफ्टिंग की अनिश्चितता के कारण वर्तमान बस अड्डे पर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और मरम्मत का काम भी प्रभावित हो रहा है।

  • प्रस्तावित योजनाएं ठप: नौबस्ता में नए टर्मिनल के निर्माण और वहां से बसों के संचालन की फाइलें फिलहाल धूल फांक रही हैं।

अधिकारियों का पक्ष

परिवहन निगम के सूत्रों का कहना है कि एलिवेटेड रोड के रैंप का काम पूरा होना बस अड्डे के भविष्य के लिए अनिवार्य है। यदि बिना रैंप के समन्वय के शिफ्टिंग की गई, तो भविष्य में बसों के आवागमन में और भी अधिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। शासन स्तर पर इस मामले में रिपोर्ट भेजी गई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।