कोलकाता. पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के खिलाफ कथित तौर पर की गई ‘अपमानजनक’ टिप्पणी ने राज्य की राजनीति में उबाल ला दिया है। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को लेकर सत्तापक्ष (TMC) और विपक्ष (BJP) के बीच तीखी बयानबाजी का दौर जारी है, जिससे राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहाँ आरोप है कि सत्ताधारी दल के एक नेता ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संदर्भ में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। जैसे ही इस घटना का वीडियो और जानकारी सार्वजनिक हुई, विपक्षी दलों ने इसे हाथों-हाथ लिया और इसे पूरे देश की महिलाओं और आदिवासी समाज का अपमान करार दिया।
विपक्ष का कड़ा रुख
विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। मुख्य विपक्षी दल का कहना है कि:
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राष्ट्रपति किसी पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का गौरव हैं।
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इस तरह की अभद्र टिप्पणी लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
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दोषियों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
सत्तारूढ़ दल की सफाई
दूसरी ओर, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “राजनीति से प्रेरित” बताया है। पार्टी प्रवक्ता का कहना है कि विपक्ष हार की हताशा में बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है ताकि जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाया जा सके।
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
यह विवाद केवल सड़क तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी ‘President’s Dignity’ और ‘Bengal Politics’ जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। जहाँ एक पक्ष राष्ट्रपति के सम्मान की रक्षा की बात कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे केवल एक राजनीतिक प्रोपेगेंडा बता रहा है।
विश्लेषकों का मत: जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए कोई भी दल इस मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहता। खासकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में इस विवाद का गहरा चुनावी असर देखने को मिल सकता है।
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