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अमेरिका-ईरान शांति समझौते में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठे गंभीर सवाल, अमेरिकी सांसदों ने इस्लामाबाद को घेरा

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वॉशिंगटन । मंगलवार, 7 जुलाई 2026

हाल ही में अमेरिकी और इजरायली बमबारी में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शामिल हुए थे। वहां मेमरी टीवी (Memri TV) द्वारा जारी एक वीडियो में शहबाज शरीफ को खामेनेई की जमकर तारीफ करते सुना गया। उन्होंने खामेनेई को एक “महान विद्वान और दूरदर्शी नेता” बताया और कहा कि पाकिस्तान और ईरान “दो भाई जैसे देश हैं जिनके दिल एक साथ धड़कते हैं।”

यह वीडियो सामने आने के बाद वॉशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है, क्योंकि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बेहद संवेदनशील कूटनीतिक वार्ताओं और युद्धविराम (Ceasefire) के प्रयासों में एक प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

“याद रखें पाकिस्तान वास्तव में क्या है” — सीनेटर रिक स्कॉट की तीखी टिप्पणी

फ्लोरिडा के रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वॉशिंगटन को यह नहीं भूलना चाहिए कि इस पूरे संकट के बीच पाकिस्तान का वास्तविक चरित्र क्या है।

स्कॉट ने पाकिस्तान के इतिहास पर उंगली उठाते हुए कहा:

“हम एक ऐसे देश की बात कर रहे हैं जहां खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन एक दशक तक सुरक्षित छिपा रहा। जहां आज भी भेदभावपूर्ण ईशनिंदा कानूनों (Blasphemy Laws) का सहारा लेकर ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जाता है। ऐसे देश के प्रधानमंत्री जब नरसंहार करने वाले एक तानाशाह की तारीफ करते हैं, तो उनकी मंशा साफ हो जाती है।”

उन्होंने आगे जोड़ा कि पाकिस्तान इस वैश्विक विवाद में मध्यस्थता करने के लिए हमास जैसे संगठनों को पनाह देने वाले कतर से ज्यादा काबिल या निष्पक्ष नहीं है।

फॉक्स न्यूज के कमेंटेटर ने शरीफ को कहा ‘मसखरा’

शहबाज शरीफ का वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद अमेरिकी मीडिया में भी इसकी तीखी आलोचना हो रही है। फॉक्स न्यूज के प्रसिद्ध कमेंटेटर मार्क लेविन ने तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए ‘मसखरा’ (Clown) तक कह दिया। लेविन ने कहा कि यह सोचना भी परे है कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत के लिए ऐसे देश को अपना मध्यस्थ बना रहा था। उन्होंने अमेरिका को अपनी नीतियों में तुरंत सुधार करने और संभल जाने की चेतावनी दी।

सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पहले ही चेताया था

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी सीनेटरों ने इस शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान को शामिल करने का विरोध किया है। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी माने जाने वाले सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी कांग्रेस की सुनवाई के दौरान पाकिस्तान के इरादों पर शक जाहिर किया था।

ग्राहम के अनुसार, “यह साफ है कि मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान का होना बेहद समस्याजनक है। इजरायल के प्रति उनकी दुश्मनी छिपी नहीं है। इसके अलावा, पाकिस्तानी एयर बेस पर ईरानी सैन्य विमानों को पनाह दिए जाने की रिपोर्ट्स और पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का यह बयान कि वे कभी ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) का हिस्सा नहीं बनेंगे, यह साबित करता है कि पाकिस्तान निष्पक्ष नहीं रह सकता।”

कूटनीतिक मोड़: इस्लामाबाद समझौता और भविष्य की राह

गौरतलब है कि साल 2026 की शुरुआत में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के बाद, जून में पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक युद्धविराम हुआ था, जिसे ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (Islamabad MoU) के नाम से जाना जाता है। हालांकि, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हुई वार्ताएं किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचे बिना समाप्त हो गई थीं क्योंकि दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर गहरे मतभेद हैं।

अब जबकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का झुकाव खुले तौर पर ईरान की तरफ दिख रहा है, वॉशिंगटन में इस बात की मांग तेज हो गई है कि पाकिस्तान को इस शांति प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर किया जाए। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी प्रशासन इस दबाव के बीच ईरान के साथ अपनी बातचीत को कैसे आगे बढ़ाता है।

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • अमेरिकी सांसदों ने ‘अमेरिका-ईरान शांति समझौते’ (US-Iran Peace Deal) में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

  • ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के बयान से विवाद गहराया।

  • सीनेटर रिक स्कॉट और लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान के इतिहास और इजरायल-विरोधी रुख को लेकर उसकी मध्यस्थता पर सवाल उठाए।

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