वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाते हुए 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों, संधियों और मंचों से अमेरिका के बाहर होने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। इन संगठनों में भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाला अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) भी शामिल है, जिसका मुख्यालय भारत (गुरुग्राम) में स्थित है।
राष्ट्रपति का कार्यकारी आदेश: मुख्य बिंदु
व्हाइट हाउस द्वाराजारी राष्ट्रपति ज्ञापन (Presidential Memorandum) के अनुसार, अमेरिका ने उन सभी संस्थानों से अपनी सदस्यता और फंडिंग खत्म करने का फैसला किया है जो “अमेरिकी राष्ट्रीय हितों के विपरीत” काम कर रहे हैं।
कुल संगठन: 66 (जिनमें 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़े निकाय और 35 गैर-यूएन संगठन शामिल हैं)।
प्रभाव: इन संगठनों को दी जाने वाली करोड़ों डॉलर की अमेरिकी फंडिंग और भागीदारी तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) पर गहरा असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी पहल के लिए अमेरिका का बाहर निकलना एक कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।
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क्यों छोड़ा: ट्रंप प्रशासन ने ISA जैसे संगठनों को “जलवायु रूढ़िवादिता” (Climate Orthodoxy) का हिस्सा बताया है, जो उनकी नजर में अमेरिकी ऊर्जा संप्रभुता के लिए खतरा है।
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इतिहास: अमेरिका 2016 में ओबामा प्रशासन के दौरान इस गठबंधन में शामिल हुआ था, लेकिन अब ट्रंप ने इसे “व्यर्थ और करदाताओं के पैसे की बर्बादी” करार दिया है।
निशाने पर आए अन्य प्रमुख वैश्विक निकाय
जलवायु और पर्यावरण: UNFCCC (जलवायु परिवर्तन पर यूएन फ्रेमवर्क), IPCC (इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज), और IRENA (इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी)।
मानवाधिकार और सामाजिक: संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) और आर्थिक एवं सामाजिक मामलों का विभाग (DESA)।
व्यापार और कानून: अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र (ITC) और अंतरराष्ट्रीय कानून आयोग।
ट्रंप प्रशासन का तर्क: “अमेरिका फर्स्ट”
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि कई अंतरराष्ट्रीय संगठन अब “ग्लोबलिस्ट एजेंडा” और “प्रगतिशील विचारधारा” का केंद्र बन गए हैं, जो अमेरिकी करदाताओं के हितों की रक्षा नहीं करते। प्रशासन का मानना है कि इन निकायों से बाहर निकलकर अमेरिका अरबों डॉलर बचाएगा और अपनी स्वायत्तता को सुरक्षित रखेगा।
“हम उन संगठनों को फंड देना बंद कर रहे हैं जो अक्षम हैं या जो अमेरिका की संप्रभुता और आर्थिक समृद्धि को बाधित करने की कोशिश करते हैं।” — व्हाइट हाउस प्रेस विज्ञप्ति
भारत और विश्व पर क्या होगा प्रभाव?
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के हटने से सौर ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई की फंडिंग में बड़ी कमी आ सकती है। हालांकि, भारत ने पहले ही स्पष्ट किया है कि वह अन्य मित्र राष्ट्रों के साथ मिलकर ISA के लक्ष्यों को आगे बढ़ाता रहेगा।
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