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अदाणी मंगल सेवाः एक संकल्प जो बदल रहा है दिव्यांग महिलाओं की जिंदगी

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5 फरवरी 2026 को अहमदाबाद के शांतिग्राम में शादी की सालगिरह का एक समारोह कुछ अलग था। शादी की पहली सालगिरह का यह समारोह था अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के बेटे जीत और दिवा अदाणी का। बहुत से लोग इस समारोह का हिस्सा थे। लेकिन वो न सिलेब्रिटी थे और न बिजनेसमैन। वे ऐसे लोग थे जो शायद पहली बार ऐसे किसी समारोह में शामिल हो रहे थे। इन लोगों में शामिल थीं दिव्यांग महिलाएं और उनके परिवार के सदस्य।

इस समारोह को और भी खास बनाया मौजूद दिव्यांग महिलाओं की कहानियों ने। ऐसी दिव्यांग महिलाएं जिनका जीवन परिस्थितियों के कारण थम गया था। उनकी सबसे बड़ी चिंता थी आर्थिक सुरक्षा। उन्हें इन अड़चनों ने रोक रखा था। इस समराहो में उन अड़चनों से आजाद होने का उत्सव मनाया गया। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदानी की ‘सेवा ही साथना है’ के दर्शन ने इनकी जिंदगी बदलने का काम किया।

रीना बेन की जिंदगी पल भर में बदली
5 फरवरी की शाम जब रीना शांतिग्राम के बेल्वेडियर क्लब के लॉन में पहुंची, तो वह समारोहों या भाषणों के बारे में नहीं सोच रही थी। वह अपनी माँ के बारे में सोच रही थी। पाँच साल पहले रीना की रीढ़ की हड्डी में लगी चोट ने उसके सिलाई के काम को अचानक रोक दिया था। जिससे उसके परिवार का सहारा देने वाली नियमित आय छिन गई थी। इसके बाद एक-एक जरूरत के लिए दूसरे के सामने हाथ फैलाने की वजह से उनका आत्मविश्वास रसातल में चला गया। उस शाम जब उनके हाथों में अदाणी समूह की तरफ से दिया गया फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) का प्रमाणपत्र आया तो जैसे उनकी जिंदगी ही बदल गई। उनकी शारीरिक स्थिति में भले ही कोई बदलाव नहीं आया लेकिन भावात्मक स्तर पर सबकुछ बदल चुका था। अब उनके मन में अनिश्चितता का अंधेरा नहीं बल्कि भविष्य में एक नई उम्मीद की लौ जल चुकी थी।

रीना उन दिव्यांग महिलाओं में से एक थीं जिन्हें इस साल अदाणी मंगल सेवा के तहत सहायता प्रदान की गई।

मदद पाने वाली रीना बेन अकेली नहीं हैं। कुछ ऐसी कहानी कच्छ की सविता बेन, भरूच की नेहल और दडका गांव की कुसुम बेन की भी है। ये महिलाओं गुजरात के अलग-अलग कोनों से यहां पहुंचीं थीं। इनकी परिस्थितियां अलग-अलग थी लेकिन जिंदगी के एक साझे संघर्ष ने इन्हें आपस में बांध रखा था। इन सभी के लिए अदाणी मंगल सेवा सिर्फ एक मौका नहीं बल्कि जिंदगी को बदलने का एक जरिया बना।
मंगल सेवा के मूल में है सेवा ही साधना है की भावना

मंगल सेवा, अदाणी समूह की सीएसआर ब्रांच, अदाणी फाउंडेशन द्वारा संचालित एक पहल है। यह कार्यक्रम गौतम अदाणी के सेवा ही साधना है के मूल मंत्र से प्रेरित है। इसकी परिकल्पना 25 से 40 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं को ध्यान में रख कर की गई है। यह कार्यक्रम अस्थायी राहत के बजाय दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। प्रत्येक लाभार्थी को 10 लाख रुपए की सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) मिलती है, जिसे सुनिश्चित मासिक आय प्रदान करने के लिए संरचित किया गया है, और 10 वर्षों के बाद मूलधन तक पहुंच की सुविधा भी उपलब्ध है। यह विचार सरल और क्रियान्वयन में शक्तिशाली है। इसका उद्देश्य है निश्चितता के माध्यम से सम्मान।

इसमें हर साल 500 महिलाओं को सशक्त करने का संकल्प लिया गया है। इस कार्यक्रम की निरंतरता और व्यापकता को सुनिश्चित करने के लिए हर साल 50 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस मौके पर अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने ‘अदाणी मंगल सेवा: गरिमा और आशा की यात्राएँ’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया। इस पुस्तक में दर्ज कहानियाँ इस बात की गहरी समझ देती हैं कि यह प्रयास प्रत्येक दिव्यांग लाभार्थी के लिए क्या मायने रखता है। यह पुस्तक केवल सेवा कार्यों का ब्यौरा नहीं देती, बल्कि जीवन के उन महत्वपूर्ण मुकामों को दर्ज करती है जो जीवन में चुपचाप बदलाव लाते हैं।

एक शाम जो जिंदगी भर रहेगी याद
बेल्वेडियर क्लब में हुआ यह समारोह भले ही लोगों को साधारण लगे लेकिन कई लोगों के लिए यह जिंदगी भर याद रहने वाला अनुभव बन गया। मौजूद लाभार्थी महिलाओं और उनके परिवारों ने अपनी जिंदगी के अनुभव साझा किए। गुजरात के छोटे शहर की एक युवती ने बताया कि कैसे सुनिश्चित आय ने उसे कंप्यूटर कोर्स में दाखिला लेने में सक्षम बनाया। एक अन्य श्रवण बाधित युवती ने दुभाषिए के माध्यम से बताया कि अब वह अब खुद को परिवार पर बोझ जैसा महसूस नहीं करती। एक मां अपनी बेटी के बगल में बैठी थी, दोनों अलग-अलग वक्त पर इस कार्यक्रम में लाभार्थी थीं, और अब उनका जीवन अनिश्चितता की राह से निकल कर निश्चितता की तरफ मुड़ रहा है।

जिंदगी के नए पड़ाव पर लिया बड़ा संकल्प
मंगल सेवा की शुरुआत के पीछे की कहानी भी रोचक है। गौतम अदाणी के बेटे जीत अदाणी और दिवा अदाणी 7 फरवरी 2025 को दाम्पत्य बंधन में बंध गए। अपने विवाह से पहले 5 फरवरी 2025 को उन्होंने संकल्प लिया कि जीवन के इस पड़ाव को खास बनाना है। इसके लिए उन्होंने सेवा के रास्ते को चुना। यह कार्यक्रम विवाह समारोह में लिए गए एक व्यक्तिगत निर्णय से शुरू हुआ और व्यापक सेवा का मौका बन गया। इसके पीछे की सोच थी कि दिखावे के बजाय संयम बरता जाए। उन्होंने इस क्षण को दिव्यांग महिलाओं के लिए दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा की दिशा में समर्पित करने का संकल्प लिया। एक व्यक्तिगत प्रतिज्ञा के रूप में शुरू हुआ इस प्रयास ने अदाणी फाउंडेशन के माध्यम से संस्थागत रूप ले लिया। जिसने जमीनी स्तर के सहयोगी संगठन यूथ फॉर जॉब्स के साथ मिलकर उन लाभार्थियों की पहचान की। इन सभी लाभार्थियों के पास विशिष्ट विकलांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी) हैं।

अदाणी परिवार ने जताई खुशी
इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना से हुई। इसके बाद सादे कार्यक्रम में 10 लाख-10 लाख रुपए के फिक्स्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट लाभार्थियों को सौंपे गए। इस मौके पर अहमदाबाद के नेत्रहीन संघ द्वारा गरबा और फ्यूजन संगीत प्रस्तुति सहित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया।

मौके पर मौजूद गौतम अदाणी ने अपने सोशल मीडिया एक्स पोस्ट में लिखा –
“आज के ही दिन पिछले वर्ष उन्होंने ‘मंगल सेवा’ का संकल्प लिया था, जिसके तहत हर वर्ष 500 नवविवाहित दिव्यांग बहनों को प्रति बहन 10 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग देने का प्रण किया गया, जो आज भी उसी समर्पण के साथ आगे बढ़ रहा है। यह मेरे लिए अत्यंत संतोष और कृतज्ञता का विषय है।

समय के साथ इस प्रयास ने अनेक परिवारों के जीवन में सम्मान और नई उम्मीद के साथ एक नई शुरुआत का अवसर दिया है। सच कहूं तो, जब किसी बेटी के जीवन में मुस्कान और आत्मविश्वास लौटता है, उस क्षण का संतोष ऐसा होता है, जिसके आगे दुनिया की बड़ी से बड़ी उपलब्धि और वैभव भी छोटे लगते हैं।

एक पिता के रूप में मैं स्वयं को धन्य महसूस करता हूँ कि मेरे बच्चे अपनी खुशियों के साथ अनेक परिवारों के जीवन में भी आशा और मुस्कान जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
मेरी प्रभु से यही प्रार्थना है कि सेवा का यह भाव आगे भी अनेक परिवारों के जीवन में सुख, सम्मान और नई आशा लेकर आता रहे, और जीत व दिवा इस मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहें।“

उस शाम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अध्यक्ष श्री गौतम अदानी का था।

मौजूद लाभार्थियों और मेहमानों को संबोधित करते हुए, अदाणी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा -“आज का दिन मेरे लिए अत्यंत भावपूर्ण और गर्व से भरा हुआ है। हम यहां केवल एक कार्यक्रम के लिए नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा, आशा, सपनों और सशक्तिकरण का सम्मान करने के लिए एकत्रित हुए हैं। अदाणी मंगल सेवा की प्रेरणा एक सरल लेकिन गहन विचार से जन्मी है। वह विचार है कि व्यक्तिगत आनंद का सर्वोच्च अर्थ तब मिलता है जब उसे सामूहिक कल्याण के लिए साझा किया जाता है।“

इस मौके पर बोलते हुए जीत अदाणी ने कहा, “मंगल सेवा ने हमें सिखाया है कि कभी-कभी सबसे बड़ा सहयोग वह होता है जो खामोशी से मिलता रहता है – स्थिर, भरोसेमंद और सम्मानजनक। हमारे लिए यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे हम एक बार पूरा करके आगे बढ़ जाएं। यह एक जिम्मेदारी है जिसे हम निभाते रहेंगे।”
दिवा अदाणी ने कहा, “अदाणी मंगल सेवा एक विश्वास पर आधारित है। यह विश्वास कि सुरक्षा स्थायी होनी चाहिए। यह विश्वास कि गरिमा कभी भी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।”

शाम ढलने के बाद भी लाभार्थी परिवार के लोग वहीं ठहरे रहे। कुछ ने तस्वीरें खींचीं। कुछ चुपचाप बैठे उस पल को महसूस कर रहे थे। रीना जैसी महिलाओं के लिए, यह रात किसी अंत का प्रतीक नहीं थी। यह एक अनजाने बोझ के हटने का प्रतीक थी। जिंदगी की निश्चितता, मानवीय गरिमा और स्वतंत्रता यही है मंगल सेवा का सार । मंगल सेवा दान नहीं, उत्सव नहीं, बल्कि कुछ दुर्लभ विश्वास को धीरे-धीरे, सोच-समझकर वास्तविक जीवन की सुरक्षा में बदलने का मिशन है।

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