बीजिंग. चीन के राष्ट्रपति और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के अध्यक्ष शी चिनफिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर गहरी पैठ बना चुके भ्रष्टाचार पर अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) के वार्षिक सत्र के दौरान सैन्य प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, चिनफिंग ने स्पष्ट किया कि सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी।
प्रमुख बिंदु: वफादारी और अनुशासन पर जोर
राष्ट्रपति शी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सेना की ताकत केवल आधुनिक हथियारों से नहीं, बल्कि राजनीतिक वफादारी से तय होती है। उन्होंने निम्नलिखित मुख्य बातों पर जोर दिया:
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राजनीतिक अनुशासन: सभी सैन्य अधिकारियों को कम्युनिस्ट पार्टी के आदेशों का अक्षरसः पालन करना होगा।
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सफाई अभियान: सेना के भीतर किसी भी प्रकार की गुटबाजी या वित्तीय अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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आधुनिकीकरण: भ्रष्टाचार मुक्त सेना ही चीन के ‘विश्व स्तरीय सैन्य शक्ति’ बनने के सपने को पूरा कर सकती है।
शक्तिशाली सैन्य निकाय (CMC) में उथल-पुथल
यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीन की सैन्य कमान के शीर्ष स्तर पर बड़ी कार्रवाई देखी गई है। हाल ही में:
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शक्तिशाली उपाध्यक्ष झांग यूशिया समेत कई शीर्ष जनरलों को उनके पदों से हटा दिया गया है।
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6 सदस्यीय सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) में अब केवल राष्ट्रपति शी और अनुशासन प्रमुख झांग शेंगमिन ही मुख्य सक्रिय सदस्य बचे हैं।
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जनरल झांग शेंगमिन ने भी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे राष्ट्रपति के निर्देशों को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, शी चिनफिंग का यह ‘शुद्धिकरण अभियान’ (Purge) यह दर्शाता है कि वह युद्ध की तैयारी (War Preparedness) में किसी भी तरह की आंतरिक बाधा नहीं चाहते। हाल के महीनों में रॉकेट फोर्स और रक्षा मंत्रालय के बड़े चेहरों का गायब होना यह संकेत देता है कि राष्ट्रपति सेना पर अपनी पकड़ को और अधिक व्यक्तिगत और सख्त बना रहे हैं।
नोट: यह अभियान न केवल भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए है, बल्कि चीन की वैश्विक सैन्य महत्वाकांक्षाओं के लिए एक “अनुशासित और वफादार” नेतृत्व तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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