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उत्तराखंड UCC संशोधन 2026: लिव-इन और विवाह नियमों में बड़े बदलाव, जानें अब क्या होगा

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देहरादून | शुक्रवार, 8 मई 2026

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू हुए एक वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने कानून को अधिक व्यावहारिक और सख्त बनाने के लिए यूसीसी (संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब शासन इन संशोधनों के आधार पर अपनी नियमावली (Rules) को अपडेट कर रहा है, जिससे दंड और पंजीकरण की प्रक्रियाओं में बड़ी स्पष्टता आएगी।

नए कड़े नियम

संशोधित नियमावली में विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जहाँ कानूनी खामियों का फायदा उठाया जा सकता था। मुख्य बदलाव निम्नलिखित हैं:

  • धोखाधड़ी पर 7 साल की सजा: यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान छुपाकर, दबाव डालकर या धोखाधड़ी से विवाह करता है या लिव-इन में रहता है, तो उसे अब 7 साल तक के कारावास का सामना करना पड़ सकता है।

  • दोहरे लिव-इन पर रोक: कानून अब स्पष्ट करता है कि एक समय में केवल एक ही लिव-इन संबंध वैध माना जाएगा। पहले से किसी के साथ लिव-इन में रहते हुए दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध बनाना अब दंडनीय अपराध है।

  • नाबालिगों का संरक्षण: यदि कोई गलत जानकारी देकर किसी नाबालिग के साथ विवाह या लिव-इन में रहता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया नियमावली में शामिल की जा रही है।

प्रशासनिक सुधार और डिजिटल पारदर्शिता

UCC के एक साल पूरे होने पर इसे “UCC Day” (27 जनवरी) के रूप में मनाया गया। इस दौरान कुछ तकनीकी और प्रशासनिक सुधार भी लागू किए गए हैं:

  1. ऑनलाइन पंजीकरण: अब विवाह का पंजीकरण 100% ऑनलाइन हो चुका है। गवाहों और दंपत्तियों को अब कार्यालय जाने की अनिवार्यता नहीं है; वे वीडियो स्टेटमेंट के माध्यम से भी सत्यापन करा सकते हैं।

  2. रजिस्ट्रार जनरल की शक्तियाँ: अब अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी को रजिस्ट्रार जनरल की शक्तियाँ दी गई हैं, जो विवाह, तलाक और लिव-इन पंजीकरण को रद्द करने का अधिकार रखते हैं।

  3. ऑटो-फॉरवर्ड सिस्टम: यदि कोई सब-रजिस्ट्रार निर्धारित समय के भीतर आवेदन पर कार्रवाई नहीं करता है, तो मामला स्वचालित रूप से उच्च अधिकारियों को स्थानांतरित हो जाएगा।

त्वरित जानकारी तालिका

विषय पुराना प्रावधान नया संशोधित प्रावधान (2026)
धोखाधड़ी से विवाह/लिव-इन सामान्य दंड 7 साल तक की जेल
लिव-इन पंजीकरण देरी जुर्माना जुर्माना और 3 से 6 महीने की जेल
विवाह पंजीकरण अवधि 6 माह 1 वर्ष (राहत के लिए बढ़ाया गया)
शब्दावली बदलाव ‘विधवा’ (Widow) ‘पति/पत्नी’ (Spouse) – लिंग तटस्थ

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