लोड हो रहा है...

उत्तराखंड UCC संशोधन 2026: लिव-इन और विवाह नियमों में बड़े बदलाव, जानें अब क्या होगा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

देहरादून | शुक्रवार, 8 मई 2026

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू हुए एक वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने कानून को अधिक व्यावहारिक और सख्त बनाने के लिए यूसीसी (संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब शासन इन संशोधनों के आधार पर अपनी नियमावली (Rules) को अपडेट कर रहा है, जिससे दंड और पंजीकरण की प्रक्रियाओं में बड़ी स्पष्टता आएगी।

नए कड़े नियम

संशोधित नियमावली में विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जहाँ कानूनी खामियों का फायदा उठाया जा सकता था। मुख्य बदलाव निम्नलिखित हैं:

  • धोखाधड़ी पर 7 साल की सजा: यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान छुपाकर, दबाव डालकर या धोखाधड़ी से विवाह करता है या लिव-इन में रहता है, तो उसे अब 7 साल तक के कारावास का सामना करना पड़ सकता है।

  • दोहरे लिव-इन पर रोक: कानून अब स्पष्ट करता है कि एक समय में केवल एक ही लिव-इन संबंध वैध माना जाएगा। पहले से किसी के साथ लिव-इन में रहते हुए दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध बनाना अब दंडनीय अपराध है।

  • नाबालिगों का संरक्षण: यदि कोई गलत जानकारी देकर किसी नाबालिग के साथ विवाह या लिव-इन में रहता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया नियमावली में शामिल की जा रही है।

प्रशासनिक सुधार और डिजिटल पारदर्शिता

UCC के एक साल पूरे होने पर इसे “UCC Day” (27 जनवरी) के रूप में मनाया गया। इस दौरान कुछ तकनीकी और प्रशासनिक सुधार भी लागू किए गए हैं:

  1. ऑनलाइन पंजीकरण: अब विवाह का पंजीकरण 100% ऑनलाइन हो चुका है। गवाहों और दंपत्तियों को अब कार्यालय जाने की अनिवार्यता नहीं है; वे वीडियो स्टेटमेंट के माध्यम से भी सत्यापन करा सकते हैं।

  2. रजिस्ट्रार जनरल की शक्तियाँ: अब अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी को रजिस्ट्रार जनरल की शक्तियाँ दी गई हैं, जो विवाह, तलाक और लिव-इन पंजीकरण को रद्द करने का अधिकार रखते हैं।

  3. ऑटो-फॉरवर्ड सिस्टम: यदि कोई सब-रजिस्ट्रार निर्धारित समय के भीतर आवेदन पर कार्रवाई नहीं करता है, तो मामला स्वचालित रूप से उच्च अधिकारियों को स्थानांतरित हो जाएगा।

त्वरित जानकारी तालिका

विषयपुराना प्रावधाननया संशोधित प्रावधान (2026)
धोखाधड़ी से विवाह/लिव-इनसामान्य दंड7 साल तक की जेल
लिव-इन पंजीकरण देरीजुर्मानाजुर्माना और 3 से 6 महीने की जेल
विवाह पंजीकरण अवधि6 माह1 वर्ष (राहत के लिए बढ़ाया गया)
शब्दावली बदलाव‘विधवा’ (Widow)‘पति/पत्नी’ (Spouse) – लिंग तटस्थ

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।