नई दिल्ली । शुक्रवार, 8 मई 2026
इतिहास केवल पत्थरों का ढेर नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की जीवंत गाथा है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में जहाँ स्मारकों को लेकर अक्सर आधी-अधूरी और भ्रामक जानकारियां परोसी जाती हैं, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एक ठोस कदम उठाया है। दिल्ली के चार प्रमुख स्मारकों—अशोक का शिलालेख, पुराना किला, कुतुब मीनार और जंतर मंतर—पर आधुनिक ‘व्याख्या केंद्र’ (Interpretation Centres) बनाने का निर्णय लिया गया है।
अशोक का शिलालेख: 2400 साल पुराने साक्ष्य की नई पहचान
सबसे पहले ईस्ट ऑफ कैलाश (श्रीनिवासपुरी) स्थित अशोकन रॉक एडिक्ट पर व्याख्या केंद्र बनाया जाएगा। 1966 में खोजा गया यह शिलालेख ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी (करीब 2400 साल पहले) का है और दिल्ली में मौर्य काल का एकमात्र सीधा प्रमाण है। यहाँ आने वाले पर्यटक अब न केवल इस शिलालेख, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में सम्राट अशोक द्वारा दिए गए शांति और धम्म के संदेशों को भी डिजिटल माध्यम से समझ सकेंगे।
पुराना किला: इंद्रप्रस्थ से मुगल काल तक का सफर
पुराना किला का इतिहास केवल शेरशाह सूरी या हुमायूं तक सीमित नहीं है। 1954 से लेकर हाल के उत्खनन (2014-23) तक यहाँ शुंग काल और उससे भी पुराने महाभारत कालीन (इंद्रप्रस्थ) साक्ष्य मिले हैं। नया व्याख्या केंद्र पर्यटकों को मुगलों से सैकड़ों साल पहले के दिल्ली के उस गौरवशाली इतिहास से परिचित कराएगा, जो अब तक केवल खुदाई की रिपोर्टों में दबा था।
जंतर मंतर: विज्ञान और खगोलशास्त्र का संगम
300 साल पुरानी इस वेधशाला का महत्व केवल इसकी बनावट में नहीं, बल्कि इसकी सटीक गणनाओं में है। यहाँ बनने वाला आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर सम्राट यंत्र और जय प्रकाश यंत्र जैसे उपकरणों की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाएगा। डिजिटल मैप और पुरानी तस्वीरों के जरिए पर्यटक देख पाएंगे कि उस दौर में बिना टेलिस्कोप के नक्षत्रों की गणना कैसे की जाती थी।
कुतुब मीनार: मीनार से पहले की दिल्ली
कुतुब मीनार परिसर में व्याख्या केंद्र इसके प्रवेश द्वार पर बनाने की योजना है। यहाँ मुख्य फोकस लौह स्तंभ (Iron Pillar) और उसका राजा अनंगपाल तोमर से संबंध पर होगा। इतिहासकार मानते हैं कि मीनार के निर्माण से पहले यहाँ भव्य मंदिर और अनंगपाल तोमर की नगरी थी। यह केंद्र मीनार के निर्माण से पहले के उस गौरवशाली स्थापत्य की जानकारी देगा।
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