रुद्रपुर । बुधवार, 10 जून 2026
उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के सीमांत इलाकों (खटीमा और नानकमत्ता) में सामने आए कथित मतांतरण (धर्म परिवर्तन) के मामलों ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। इस पूरे प्रकरण की कड़ियों को जोड़ने में जुटी विशेष जांच टीम (SIT) ने अब अपना पूरा ध्यान विदेशी फंडिंग (Foreign Funding) के कोण पर केंद्रित कर दिया है।
पुलिस को शक है कि गरीब और भोले-भले परिवारों को प्रलोभन देने के लिए विदेशों से बड़ी मात्रा में धन भेजा जा रहा था। इस सिलसिले में एसआईटी को एक बड़ी कामयाबी मिली है, जहां विभिन्न बैंकों ने आरोपितों के खातों का ब्यौरा पुलिस को सौंप दिया है।
क्या है पूरा मामला और अब तक की कार्रवाई?
खटीमा, नानकमत्ता और गदरपुर क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से स्थानीय लोगों और जनजातीय समूहों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराने की शिकायतें मिल रही थीं। शुरुआती जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए अलग-अलग थानों में कुल 5 मुकदमे दर्ज किए थे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया था।
एसआईटी इस मामले में अब तक 5 मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जबकि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
7 बैंक खातों की रिपोर्ट से खुलेगा विदेशी कनेक्शन
जांच के दौरान एसआईटी को कुछ ऐसे ठोस इनपुट मिले कि मतांतरण की गतिविधियों को संचालित करने वाले मुख्य किरदारों के रहन-सहन और आर्थिक स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में अचानक बहुत बड़ा और अस्वाभाविक बदलाव आया है। बिना किसी ठोस आय स्रोत के इतनी तेजी से अमीर होने के इसी पहलू ने पुलिस के कान खड़े कर दिए।
इसी आधार पर एसआईटी ने खटीमा और नानकमत्ता क्षेत्र के विभिन्न बैंकों से संदिग्धों के खातों की जानकारी मांगी थी। मंगलवार को विभिन्न बैंकों (जिनमें ओवरसीज बैंक, एसबीआई और बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं) ने 7 बैंक खातों की विस्तृत ट्रांजेक्शन रिपोर्ट एसआईटी को सौंप दी है।
अब जांच टीम इन खातों में हुए पाई-पाई के लेन-देन, जमा-निकासी के पैटर्न और संभावित विदेशी स्रोतों (Foreign Sources) से आए धन की बारीकी से स्क्रूटनी कर रही है। इसके साथ ही आरोपितों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को भी खंगाला जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि वे देश-विदेश में किन लोगों के संपर्क में थे।
थारू समाज और कमजोर परिवारों को बनाया जा रहा था निशाना
इस पूरे खेल का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले थारू समाज और आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवारों को सॉफ्ट टारगेट बनाया जा रहा था।
आरोपों के मुताबिक, इन परिवारों को जाल में फंसाने के लिए कई तरह के प्रलोभन दिए जा रहे थे, जैसे:
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गंभीर बीमारियों का मुफ्त और आधुनिक इलाज कराना।
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बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाना और मुफ्त शिक्षा का वादा।
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सीधे तौर पर नकद आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना।
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अन्य बुनियादी सुविधाएं और बेहतर जीवनशैली का लालच देना।
एसआईटी का मानना है कि जमीनी स्तर पर इतनी बड़ी आर्थिक सहायता बिना किसी मजबूत बैक-सपोर्ट या विदेशी फंडिंग के मुमकिन नहीं है। यही वजह है कि वित्तीय लेन-देन की जांच को इस केस का सबसे मुख्य आधार बनाया गया है।
नवीनतम अपडेट
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तथ्यों की सटीकता: शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में केवल स्थानीय स्तर पर प्रलोभन दिए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन एसआईटी की हालिया कार्रवाई यह साफ करती है कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर का नहीं बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
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अग्रिम कार्रवाई: बैंक डिटेल सामने आने के बाद, यदि विदेशी लेन-देन की पुष्टि होती है, तो इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) या अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों की एंट्री भी हो सकती है।
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