तेहरान. ईरान इस समय दशक के सबसे बड़े नागरिक विद्रोह का सामना कर रहा है। गिरती अर्थव्यवस्था और मुद्रा संकट से शुरू हुआ जनाक्रोश अब पूरे देश में फैल चुका है। शुक्रवार सुबह तक मिली रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के सभी 31 प्रांतों के कम से कम 111 शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रशासन ने इस विद्रोह को कुचलने के लिए देशव्यापी इंटरनेट और टेलीफोन ब्लैकआउट लागू कर दिया है।
आर्थिक बदहाली ने दी विद्रोह को हवा
प्रदर्शनों की शुरुआत ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ के ऐतिहासिक पतन और आसमान छूती महंगाई के कारण हुई थी। देखते ही देखते यह आर्थिक विरोध एक राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। राजधानी तेहरान, मशहद और इस्फहान जैसे प्रमुख केंद्रों में प्रदर्शनकारी “तानाशाह की मौत” और “आजादी” के नारे लगा रहे हैं।
डिजिटल अंधेरे में डूबा ईरान
वैश्विक इंटरनेट मॉनिटरिंग समूह NetBlocks और Cloudflare ने पुष्टि की है कि 8 जनवरी 2026 की रात से पूरे ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी लगभग शून्य हो गई है।
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लैंडलाइन और मोबाइल ठप: अंतरराष्ट्रीय संचार को पूरी तरह काटने के लिए लैंडलाइन और मोबाइल नेटवर्क को भी बाधित किया गया है।
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सूचना का अभाव: ब्लैकआउट के कारण प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय टूट गया है और देश के भीतर से वीडियो या तस्वीरें बाहर आना बंद हो गई हैं।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई: भारी हताहत
मानवाधिकार संगठनों (HRANA) ने चेतावनी दी है कि इंटरनेट बंद होने की आड़ में सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग कर रहे हैं।
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मृतक संख्या: अब तक सुरक्षा बलों की फायरिंग में कम से कम 45 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
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सामूहिक गिरफ्तारियां: देश भर में 2,200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र और कार्यकर्ता शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय चिंताएं
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने ईरान सरकार से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा रोकने और इंटरनेट बहाल करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो यह विरोध ईरान की सत्ता के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है।
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