वॉशिंगटन. अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में फॉक्स न्यूज को दिए गए एक साक्षात्कार ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने मेक्सिको के ड्रग कार्टेल के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई (Land Strike) शुरू करने का संकेत दिया है, जिससे न केवल मेक्सिको बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका में कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है।
ट्रंप का कड़ा रुख: “कार्टेल चला रहे हैं मेक्सिको”
ट्रंप ने अपने साक्षात्कार में बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, “हम अब कार्टेल के संबंध में जमीन पर वार करना शुरू करने जा रहे हैं।” उनके इस बयान के पीछे मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
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भारी जनहानि का दावा: ट्रंप का आरोप है कि मेक्सिकन ड्रग कार्टेल अमेरिका में हर साल 250,000 से 300,000 लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं।
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सत्ता पर नियंत्रण: उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में मेक्सिको की वास्तविक सत्ता वहां की सरकार के पास नहीं, बल्कि इन शक्तिशाली ड्रग कार्टेल के हाथों में है।
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रणनीतिक संदर्भ: यह बयान वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के ठीक बाद आया है। मादुरो को अमेरिकी बलों द्वारा पकड़े जाने के बाद अब न्यूयॉर्क में तस्करी के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे ट्रंप प्रशासन अपनी एक बड़ी जीत के रूप में देख रहा है।
मेक्सिको की दोटूक प्रतिक्रिया: संप्रभुता से समझौता नहीं
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने ट्रंप के इन संकेतों को सिरे से खारिज कर दिया है। मेक्सिको सरकार ने इसे अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर सीधे हमले के रूप में देखा है।
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हस्तक्षेप अस्वीकार्य: राष्ट्रपति शीनबाम ने स्पष्ट किया कि मेक्सिको एक संप्रभु राष्ट्र है और वह अपनी धरती पर किसी भी विदेशी सैन्य हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा।
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सहयोग बनाम सैन्य बल: उन्होंने जोर देकर कहा कि अपराध और तस्करी जैसी समस्याओं का समाधान “विदेशी सैन्य कार्रवाई” नहीं, बल्कि आपसी “राजनयिक सहयोग” और खुफिया जानकारी साझा करने से होना चाहिए।
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पुरानी पेशकश का खंडन: गौरतलब है कि ट्रंप ने पहले भी शीनबाम को सैन्य मदद की पेशकश की थी, जिसे मेक्सिको ने अपनी संप्रभुता का हवाला देते हुए ठुकरा दिया था।
अंतरराष्ट्रीय कानून और संभावित संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका बिना मेक्सिको की सहमति के कोई भी सैन्य कदम उठाता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:
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कानूनी उल्लंघन: मेक्सिको सिटी की अनुमति के बिना सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन मानी जाएगी।
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व्यापारिक संबंध दांव पर: मेक्सिको अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। सैन्य तनाव से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों और ‘USMCA’ (व्यापार समझौता) पर बुरा असर पड़ सकता है।
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क्षेत्रीय तनाव: इस बयान ने कोलंबिया और क्यूबा जैसे अन्य लैटिन अमेरिकी देशों में भी डर पैदा कर दिया है कि अमेरिका भविष्य में उन पर भी इसी तरह की कार्रवाई का दबाव बना सकता है।
निष्कर्ष: डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान आने वाले समय में अमेरिका-मेक्सिको संबंधों की दिशा तय करेगा। जहां ट्रंप इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं मेक्सिको इसे अपनी आजादी पर हमला मान रहा है।
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