लखनऊ. उत्तर प्रदेश में गंगा डॉल्फिनों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कानपुर में हाल ही में हुई डॉल्फिन की मृत्यु की घटना के बाद, अब रायबरेली जिले के सरेनी क्षेत्र के अंतर्गत गेगासो घाट के पास एक और गंगा डॉल्फिन का शव बहता हुआ मिला है। इस घटना से पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों में गहरी चिंता व्याप्त है।
घटना का विवरण और प्रशासनिक कार्रवाई
स्थानीय ग्रामीणों द्वारा डॉल्फिन का शव देखे जाने के बाद इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। विभाग ने घटना की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
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पोस्टमार्टम: मृत्यु के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया गया है।
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जांच के बिंदु: अधिकारी मुख्य रूप से तीन पहलुओं पर जांच कर रहे हैं—नदी में बढ़ता प्रदूषण, मछुआरों के जाल में फंसना, या शरीर पर किसी बाहरी चोट के निशान।
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निगरानी: क्षेत्र में अवैध शिकार की संभावनाओं और गंगा के जल की गुणवत्ता की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
पारिस्थितिक तंत्र पर बढ़ता खतरा
गंगा डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है और ‘वन्यजीव संरक्षण अधिनियम’ के तहत इसे सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त है। कानपुर और रायबरेली में कम अंतराल पर दो डॉल्फिनों की मौत होना इस बात का संकेत है कि नदी का पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डॉल्फिन—जो नदी के शुद्धिकरण का संकेत मानी जाती हैं—असुरक्षित हैं, तो यह पूरी नदी की सेहत के लिए खतरे की घंटी है।
मुख्य चिंताएं
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नदी का प्रदूषण: औद्योगिक अपशिष्ट और अन्य प्रदूषक तत्वों का गंगा में मिलना।
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अवैध गतिविधियां: संरक्षित क्षेत्रों में मछली पकड़ने के लिए प्रतिबंधित जालों का प्रयोग।
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सुरक्षा में चूक: जलीय जीवों की सुरक्षा के लिए तैनात निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता।
संबंधित अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की ठोस कार्रवाई की जाएगी।
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