देहरादून । गुरुवार, 9 जुलाई 2026
उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के झबरेड़ा क्षेत्र से एक बेहद हैरान करने वाला और दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां कतर में बैठे एक पति ने पंचायत के सामने वीडियो/ऑडियो कॉल के जरिए अपनी पत्नी को एक साथ तीन तलाक दे दिया। पीड़िता ने अपनी इद्दत की अवधि पूरी होने के बाद महिला हेल्पलाइन में न्याय की गुहार लगाई, जिसके बाद पुलिस ने पति सहित ससुराल पक्ष के 6 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
निकाह के कुछ समय बाद ही शुरू हुआ दहेज उत्पीड़न
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के छपार थाना क्षेत्र के खुड्डा गांव की रहने वाली गुलशबिस्ता का निकाह 24 नवंबर 2024 को मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार झबरेड़ा के ग्राम लाठरदेवा शेख निवासी मुईद अहमद के साथ हुआ था। गुलशबिस्ता के परिवार ने अपनी हैसियत से बढ़कर बेटी की शादी में कार, सोने-चांदी के जेवरात और नकदी समेत करीब 30 लाख रुपये खर्च किए थे।
पीड़िता का पति मुईद अहमद एमसीए (MCA) पास है और वर्तमान में कतर में एक प्रतिष्ठित कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत है। उच्च शिक्षित और अच्छे पद पर होने के बावजूद मुईद और उसका परिवार इस शादी और दहेज से खुश नहीं था।
स्कॉर्पियो कार और ₹30 लाख की अतिरिक्त मांग
गुलशबिस्ता का आरोप है कि ससुराल कदम रखते ही उसकी सास शाहीन, ससुर ईसा, ननद शबनूर व गुलफसा और देवर बाबर अली ने उसे कम दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। ससुराल वाले लगातार उस पर मायके से टॉप मॉडल स्कॉर्पियो कार या ₹30 लाख नकद लाने का दबाव बना रहे थे।
बेटी का घर बसाने और उसे इस नरक से बचाने के लिए गुलशबिस्ता के माता-पिता ने बीच में ₹2 लाख नकद और सास के लिए ₹3 लाख की सोने की चेन भी दी। लेकिन इसके बाद भी ससुराल वालों का लालच कम नहीं हुआ।
बीच सड़क पर मारपीट और घर से निकाला
प्रताड़ना का सिलसिला यहीं नहीं रुका। 15 फरवरी 2025 को आरोपियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने गुलशबिस्ता को जबरन एक बोलेरो गाड़ी में बैठाया और लाठरदेवा शेख में रेलवे अंडरपास के पास बीच सड़क पर लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा। इसके बाद उसे चलती गाड़ी से नीचे उतार दिया गया। इस घटना के अगले ही दिन, यानी 16 फरवरी 2025 को पति मुईद अहमद वापस कतर चला गया।
भरी पंचायत में ऐप के जरिए दिया ‘तीन तलाक’
मामले को सामाजिक स्तर पर सुलझाने के लिए 11 जनवरी 2026 की रात को ग्राम खाताखेड़ी में अजरार अहमद की बैठक पर दोनों पक्षों की एक बड़ी पंचायत बुलाई गई थी। पंचायत में समाज के कई गणमान्य और मौजिज लोग मौजूद थे।
जब पंचायत के लोगों ने ससुराल पक्ष से गुलशबिस्ता को वापस गरिमा के साथ घर ले जाने की बात कही, तो वे अपनी पुरानी मांग (स्कॉर्पियो कार या ₹30 लाख) पर अड़े रहे। इसी बीच देवर बाबर अली ने कतर में बैठे अपने भाई मुईद अहमद को एक मोबाइल ऐप के जरिए वीडियो/ऑडियो कॉल की।
जब फोन का स्पीकर ऑन करके मुईद को बताया गया कि लड़की वाले इतनी बड़ी मांग पूरी करने में असमर्थ हैं, तो उसने पूरी पंचायत और समाज के सामने फोन पर ही गुलशबिस्ता को एक साथ तीन तलाक दे दिया और रिश्ता खत्म करने का ऐलान कर दिया। इतना ही नहीं, पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच जारी
इस घटना के बाद पीड़िता ने अपनी इद्दत (तलाक या पति की मृत्यु के बाद महिला के लिए तय प्रतीक्षा अवधि) पूरी की। इसके बाद उन्होंने महिला हेल्पलाइन रुड़की में न्याय की गुहार लगाई।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर थाना झबरेड़ा पुलिस ने पति मुईद अहमद, सास शाहीन, ससुर ईसा, ननद शबनूर, गुलफसा और देवर बाबर अली समेत सभी 6 नामजद आरोपियों के खिलाफ कानूनी धाराओं और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. झबरेड़ा तीन तलाक मामला क्या है?
यह उत्तराखंड के झबरेड़ा का मामला है, जहां कतर में मैनेजर के पद पर कार्यरत पति मुईद अहमद ने अपनी पत्नी गुलशबिस्ता को फोन/ऐप के जरिए भरी पंचायत के सामने तीन तलाक दे दिया।
Q2. पीड़िता से किस चीज की मांग की जा रही थी?
ससुराल पक्ष शादी में ₹30 लाख खर्च होने के बाद भी खुश नहीं था और पीड़िता से टॉप मॉडल स्कॉर्पियो कार या ₹30 लाख नकद की अतिरिक्त मांग कर रहा था।
Q3. पुलिस ने किन लोगों के खिलाफ और किस कानून के तहत कार्रवाई की है?
झबरेड़ा पुलिस ने पति, सास, ससुर, देवर और दो ननदों (कुल 6 लोग) के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम’ के तहत की गई है।
Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख प्राप्त समाचार रिपोर्ट और दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत (तहरीर) के तथ्यों पर आधारित है। मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और कानूनी रूप से दोष सिद्ध होना बाकी है।
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