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UP Registry New Rules: योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब बिना इन कागजों के नहीं होगी जमीन-मकान की रजिस्ट्री!

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में जमीन, मकान और फ्लैट की धोखाधड़ी से होने वाली रजिस्ट्री पर नकेल कसने के लिए योगी सरकार ने सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पंजीकरण अधिनियम (Registration Act, 1908) में बड़े संशोधनों को मंजूरी दी गई है। अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले उसके स्वामित्व (Ownership) से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच अनिवार्य होगी।

रजिस्ट्रार को मिले ‘इनकार’ करने के अधिकार

अभी तक उप-निबंधकों के पास संदिग्ध मामलों में रजिस्ट्री रोकने के स्पष्ट कानूनी अधिकार नहीं थे। सरकार अब अधिनियम में नई धाराएं 22-A, 22-B और 35-A जोड़ने जा रही है। इन प्रावधानों के लागू होने के बाद:

  • उप-निबंधक मालिकाना हक के दस्तावेज न होने पर रजिस्ट्री करने से मना कर सकेंगे

  • प्रतिबंधित, कुर्क की गई या सरकारी संपत्तियों के अवैध अंतरण पर पूरी तरह रोक लगेगी।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में खतौनी और शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों द्वारा जारी पीला कार्ड जैसे दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी।

फर्जीवाड़ा रोकने के लिए डिजिटल कवच

प्रदेश के स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि क्रेता और विक्रेता की पहचान पहले से ही आधार और ओटीपी के जरिए सत्यापित की जा रही है। अब स्वामित्व की जांच अनिवार्य होने से असली मालिक की जगह किसी अन्य द्वारा संपत्ति बेचने के मामलों पर विराम लगेगा, जिससे अदालती मुकदमों में भारी कमी आएगी।

गिफ्ट डीड (दान विलेख) के नियमों में भी बदलाव

कैबिनेट ने इंडियन स्टांप एक्ट, 1899 में भी संशोधन को हरी झंडी दी है। इसके तहत:

  1. रक्त संबंधियों के लिए: गिफ्ट डीड पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी पूर्ववत ₹5,000 ही रहेगी।

  2. निबंधन शुल्क (Registration Fee): अब संपत्ति के सर्किल रेट का 1 प्रतिशत निबंधन शुल्क के रूप में देय होगा।

अगला कदम: कैबिनेट की इस मंजूरी के बाद अब इन संशोधनों से संबंधित विधेयक को आगामी विधानमंडल सत्र में पेश किया जाएगा, जिसके बाद ये नियम पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएंगे।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।