कोलकाता | बुधवार, 10 जून 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक संकट सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 19 सांसदों के अलग गुट बनाने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने के दावों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।
सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा है, जिसमें अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग की गई है। दावा किया जा रहा है कि इस पत्र पर 19 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। यदि यह संख्या सही साबित होती है तो यह टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
लोकसभा चुनाव और उसके बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच टीएमसी के कई सांसदों की नाराजगी की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। अब दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 19 सांसदों ने नेतृत्व से असहमति जताते हुए अलग राह चुनने का फैसला किया है।
हालांकि अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कई सांसदों की ओर से सार्वजनिक बयान भी सामने नहीं आए हैं, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और सांसदों के आधिकारिक रुख से तस्वीर साफ होगी।
किन सांसदों के नाम आ रहे हैं सामने?
मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार जिन सांसदों के नाम बागी खेमे से जोड़े जा रहे हैं, उनमें काकोली घोष दस्तीदार, यूसुफ पठान, सायोनी घोष, शत्रुघ्न सिन्हा, माला रॉय, पार्थ भौमिक, अबू ताहेर खान, बापी हलदार, जून मालिया, दीपक अधिकारी (देव), रचना बनर्जी सहित कई अन्य सांसदों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन सभी नामों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। कुछ सांसदों की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती?
यदि 19 सांसदों के अलग होने का दावा सही साबित होता है तो यह ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हो सकती है। तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत रही है, लेकिन हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाओं को तेज कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह बगावत और आगे बढ़ती है तो इसका असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।
क्या NDA को मिलेगा फायदा?
यदि बागी सांसद वास्तव में एनडीए को समर्थन देते हैं तो लोकसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति और मजबूत हो सकती है। हालांकि अभी तक भाजपा या एनडीए की ओर से इस विषय पर कोई विस्तृत आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है और पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए गठबंधन या पुनर्संरचना की संभावनाएं भी पैदा कर सकता है।
टीएमसी की रणनीति क्या होगी?
सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी और पार्टी के शीर्ष नेता लगातार सांसदों के संपर्क में हैं। पार्टी नेतृत्व इस संकट को नियंत्रित करने और संगठन को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में टीएमसी की रणनीति और बागी सांसदों के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
अभी क्या है वास्तविक स्थिति?
फिलहाल यह मामला दावों और प्रतिदावों के बीच है। बागी सांसदों की वास्तविक संख्या, लोकसभा अध्यक्ष का रुख और टीएमसी नेतृत्व की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में स्थिति को स्पष्ट करेगी। इसलिए इस घटनाक्रम को अंतिम राजनीतिक विभाजन मानना अभी जल्दबाजी होगी।
Matribhumisamachar


