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Super Garuda Shield 2026: इंडोनेशिया में भारतीय सेना का शक्ति प्रदर्शन, एयरबोर्न जंप और साइबर डिफेंस में जमाई धाक

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read
नई दिल्ली | 
इंडोनेशिया में आयोजित हो रहे बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास Super Garuda Shield 2026 में भारतीय सशस्त्र बलों ने अपनी उत्कृष्ट युद्ध क्षमता और रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन किया है। 31 अगस्त से 11 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस विशाल सैन्य अभ्यास में दुनिया भर के 21 देशों के लगभग 4,743 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं।
यह अभ्यास अब केवल इंडोनेशिया और अमेरिका के बीच का द्विपक्षीय कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और शांति का एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय मंच बन चुका है।

अभ्यास की मुख्य विशेषताएं और भारत की भूमिका

1. संयुक्त एयरबोर्न ऑपरेशन (Multinational Airborne Operation)

भारतीय सैनिकों ने अमेरिका, जापान, फ्रांस और इंडोनेशिया की सेनाओं के साथ मिलकर संयुक्त पैराशूट जंप और जटिल एयरबोर्न प्रशिक्षण में भाग लिया। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में दुश्मनों की सीमा में तेजी से उतरकर त्वरित कार्रवाई करने की क्षमता को परखना था।

2. इंटरऑपरेबिलिटी और सामरिक समन्वय

अभ्यास का एक बड़ा उद्देश्य विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच संचार प्रणाली (Communication Systems), युद्ध रणनीति और तकनीकी समन्वय को बेहतर बनाना है। भारतीय सैनिकों ने पश्चिमी और एशियाई मित्र देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया, जिससे संयुक्त ऑपरेशन्स को अंजाम देना आसान होगा।

3. बहुआयामी सैन्य प्रशिक्षण (Multi-Domain Training)

इस अभ्यास में केवल पारंपरिक युद्ध ही शामिल नहीं है, बल्कि आधुनिक समय की चुनौतियों से निपटने के लिए कई तरह के सत्र आयोजित किए गए:
  • साइबर डिफेंस (Cyber Defense): डिजिटल हमलों से सैन्य नेटवर्कों की सुरक्षा करना।
  • जंगल युद्ध प्रशिक्षण (Jungle Warfare): घने जंगलों में छिपे दुश्मनों से निपटने का अभ्यास।
  • लाइव-फायर ऑपरेशन्स (Live-Fire Drills): वास्तविक हथियारों के साथ मारक क्षमता का परीक्षण।
  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR): प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित राहत कार्य प्रदान करना।

भारत के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक महत्व

इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और ‘नेविगेशन की स्वतंत्रता’ (Freedom of Navigation) बनाए रखने के दृष्टिकोण से यह अभ्यास बेहद महत्वपूर्ण है।
  1. एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूती: इंडोनेशिया भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी है। इस अभ्यास में भागीदारी भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और क्षेत्र में ‘सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ (SAGAR) विजन को धरातल पर उतारती है।
  2. वैश्विक मंच पर उभरती शक्ति: अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसी वैश्विक महाशक्तियों के साथ एक ही मंच पर भारतीय सेना का यह प्रदर्शन दिखाता है कि भारत वैश्विक सुरक्षा चिंताओं से निपटने के लिए एक विश्वसनीय भागीदार है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: Super Garuda Shield 2026 कब से कब तक आयोजित किया जा रहा है?
उत्तर: यह बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास 31 अगस्त से 11 सितंबर 2026 तक इंडोनेशिया में आयोजित किया जा रहा है।
प्रश्न 2: Super Garuda Shield 2026 में कुल कितने देश और सैनिक भाग ले रहे हैं?
उत्तर: इसमें 21 देशों के लगभग 4,743 सैन्यकर्मी शामिल हैं।
प्रश्न 3: इस अभ्यास में भारत के अलावा कौन-कौन से प्रमुख देश शामिल हैं?
उत्तर: भारत के अलावा अमेरिका, इंडोनेशिया, जापान, फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य सहयोगी देश इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
प्रश्न 4: क्या इस अभ्यास में केवल हवाई ऑपरेशन्स ही शामिल हैं?
उत्तर: नहीं, एयरबोर्न ऑपरेशन्स के अलावा इसमें साइबर डिफेंस, जंगल वॉरफेयर, लाइव-फायर ड्रिल्स और आपदा राहत (HADR) कार्य भी शामिल हैं।
Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख रक्षा अभ्यास से संबंधित उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों और आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।