लखनऊ. कानपुर, जिसे कभी गंगा नदी के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता था, वहां 2025–26 के दौरान गंगा सफाई अभियान में आंशिक सुधार देखने को मिला है। घरेलू सीवेज, औद्योगिक कचरा और जाजमऊ की टेनरियों से निकलने वाला क्रोमियम प्रदूषण लंबे समय से गंगा के लिए गंभीर खतरा रहा है।
हालांकि केंद्र सरकार के ‘नमामि गंगे मिशन’ और राज्य सरकार के प्रयासों से कई बड़े नाले टैप किए गए हैं, फिर भी जल गुणवत्ता मानकों को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती।
🔴 कानपुर में गंगा प्रदूषण की वर्तमान स्थिति
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित एजेंसियों की 2025–26 की निगरानी रिपोर्ट के अनुसार:
- BOD स्तर अब भी चिंता का विषय
जाजमऊ, शेखपुरा और आसपास के क्षेत्रों में गंगा का BOD स्तर 4 से 5.5 mg/l रिकॉर्ड किया गया है, जबकि निर्धारित मानक 3 mg/l है। - जलीय जीवन पर असर
घुलित ऑक्सीजन (DO) में गिरावट के कारण मछलियों और अन्य जलीय जीवों का जीवन संकट में बना हुआ है। - भूजल प्रदूषण की समस्या जारी
जाजमऊ और रानिया (कानपुर देहात) क्षेत्रों में क्रोमियम युक्त अपशिष्ट के कारण भूजल अब भी दूषित पाया गया है। फरवरी 2026 से IIT कानपुर और NGT की निगरानी में स्वास्थ्य व पर्यावरणीय सर्वे चल रहा है।
🟢 ‘नमामि गंगे’ अभियान के तहत हुई बड़ी प्रगति
✔️ सीसामऊ नाला पूरी तरह टैप
- एशिया के सबसे गंदे नालों में शामिल सीसामऊ नाला अब पूरी तरह टैप किया जा चुका है।
- इसका 140 MLD सीवेज सीधे गंगा में न गिरकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में भेजा जा रहा है।
✔️ नए STP से बढ़ी ट्रीटमेंट क्षमता
- जाजमऊ में 130 MLD का STP अक्टूबर 2025 से चालू।
- पनका में 30 MLD STP पहले से संचालित।
- कुल मिलाकर कानपुर की सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता लगभग 450 MLD तक पहुंच चुकी है।
✔️ नालों की व्यापक टैपिंग
- शहर के 400 से अधिक छोटे-बड़े नालों में से अधिकांश टैप किए जा चुके हैं।
- हालांकि भारी बारिश के दौरान कुछ नालों का ओवरफ्लो अब भी चिंता का कारण बना हुआ है।
🏭 औद्योगिक प्रदूषण पर शिकंजा
जाजमऊ क्षेत्र की टेनरियां अब भी गंगा प्रदूषण का प्रमुख औद्योगिक स्रोत हैं।
- CETP की क्षमता बढ़ाई गई ताकि टेनरियों के अपशिष्ट का बेहतर शोधन हो सके।
- रोस्टर सिस्टम लागू
माघ मेला 2026 और प्रमुख पर्वों के दौरान टेनरियों को लगभग 24 दिनों तक बंद रखने के आदेश दिए गए। - रीयल-टाइम मॉनिटरिंग
नियम उल्लंघन करने वाली फैक्ट्रियों को सील किया जा रहा है और ऑनलाइन निगरानी से पानी की गुणवत्ता पर नजर रखी जा रही है।
⚠️ गंगा सफाई की राह में अब भी बाधाएं
- STP रखरखाव में खामियां
कई बार तकनीकी खराबी या लापरवाही से नालों का गंदा पानी फिर गंगा में पहुंच जाता है। - पुराना सीवर नेटवर्क
कानपुर का आंतरिक सीवर सिस्टम जर्जर है, जिससे सीवेज चोकिंग और ओवरफ्लो की समस्या बनी रहती है।
📊 गंगा सफाई स्थिति: एक नजर में (2025–26)
| क्षेत्र | स्थिति | टिप्पणी |
|---|---|---|
| सीसामऊ नाला | पूर्णतः टैप | गंगा में सीधा प्रवाह बंद |
| जाजमऊ औद्योगिक क्षेत्र | मध्यम सुधार | CETP व रोस्टर से नियंत्रण |
| BOD स्तर | 4 – 5.5 mg/l | मानक से अब भी अधिक |
| STP क्षमता | ~450 MLD | अधिकांश सीवेज कवर |
कानपुर में गंगा सफाई अभियान से संरचनात्मक सुधार और प्रदूषण नियंत्रण के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन BOD स्तर, भूजल प्रदूषण और सीवर सिस्टम जैसी समस्याएं अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक रखरखाव, सख्त निगरानी और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक गंगा को पूरी तरह निर्मल बनाना संभव नहीं होगा।
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