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सांबा इंटरफेथ मैरिज विवाद: सोशल मीडिया पर लड़की की अपील, ‘मर्जी से की है शादी, दबाव न बनाएं परिवारवाले’

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

जम्मू | मंगलवार, 07 अप्रैल 2026

जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में एक हिंदू युवती और मुस्लिम युवक की कोर्ट मैरिज ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया है। जहां परिवार ने इसे अपहरण (Kidnapping) का मामला बताया है, वहीं युवती ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है। पुलिस अब इस मामले में ‘बालिग होने के अधिकार’ और ‘कानूनी प्रक्रिया’ के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

? मुख्य घटनाक्रम: क्या है पूरा विवाद?

सांबा के खड़ा मदाना गांव के एक मुस्लिम युवक और हिंदू युवती के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, युवती ने युवक के साथ कोर्ट मैरिज की और कथित तौर पर इस्लाम धर्म अपनाया है। इस कदम के बाद से ही गांव और युवती के परिवार में गहरा असंतोष है।

?️ ‘मजबूरी में उठा सकती हूं बड़ा कदम’ – युवती का वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे एक वीडियो में युवती ने स्पष्ट शब्दों में अपना पक्ष रखा है:

  • स्वतंत्र इच्छा: युवती का दावा है कि उसने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से शादी की है।

  • पुरानी जानकारी: उसने कहा कि वह पिछले दो वर्षों से अपने माता-पिता को इस रिश्ते के बारे में समझा रही थी।

  • चेतावनी: युवती ने भावुक होते हुए परिवार से अपील की है कि उन पर किसी तरह का दबाव न बनाया जाए, अन्यथा वह अपनी जान देने जैसा कोई बड़ा कदम उठा सकती है।

? पुलिस की कार्रवाई और कानूनी पेच

बारी ब्राह्मणा पुलिस स्टेशन के SHO इंस्पेक्टर संदीप सिंह चिब ने पुष्टि की है कि परिवार की शिकायत पर अपहरण और चोरी की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।

पुलिस की जांच अब दो मुख्य बिंदुओं पर टिकी है:

  1. बालिग होने का प्रमाण: यदि युवती कानूनी रूप से 18 वर्ष से ऊपर है, तो सुप्रीम कोर्ट के ‘हादिया केस’ जैसे फैसलों के अनुसार उसे अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार है।

  2. मजिस्ट्रेट के सामने बयान: पुलिस युवती को ढूंढकर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करेगी, जहां धारा 164 के तहत उसके बयान दर्ज किए जाएंगे। यही बयान तय करेंगे कि FIR जारी रहेगी या रद्द होगी।

⚖️ आगे क्या होगा?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में ‘विशेष विवाह अधिनियम’ (Special Marriage Act) या धर्म परिवर्तन के कानूनों का पालन देखा जाता है। यदि युवती मजिस्ट्रेट के सामने भी अपने वीडियो वाले बयान पर कायम रहती है, तो कानून आमतौर पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देता है। हालांकि, सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बरती जा रही है।

महत्वपूर्ण नोट: यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम पारिवारिक परंपराओं के बीच एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। पुलिस प्रशासन ने जनता से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।