लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को ‘गौ-ध्वज स्थापना भारत यात्रा’ के अगले चरण के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्व में ‘गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान’ का भव्य शंखनाद हुआ। शीतला अष्टमी के पावन अवसर पर आशियाना स्थित कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल में संत समाज और गौ-भक्तों का जमावड़ा लगा। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाना और देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाना है।
🚩 काशी से लखनऊ तक का सफर: ‘धर्मयुद्ध’ का शंखनाद
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पिछले कई दिनों से गो-संरक्षण के लिए जनजागरण यात्रा पर हैं। यह यात्रा आध्यात्मिक नगरी वाराणसी से शुरू होकर जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, मोहनलालगंज, उन्नाव और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख धार्मिक व राजनीतिक केंद्रों से होते हुए मंगलवार रात लखनऊ पहुँची।
बुधवार को कार्यक्रम के दौरान स्वामी जी ने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का केंद्र है। उन्होंने आह्वान किया कि जब तक गाय को संवैधानिक रूप से राष्ट्रमाता का सम्मान नहीं मिलता, यह ‘धर्मयुद्ध’ जारी रहेगा।
📋 प्रशासन का कड़ा पहरा: 26 शर्तों के साथ मिली अनुमति
लखनऊ में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और पुलिस प्रशासन ने 26 शर्तों का एक विस्तृत मसौदा तैयार किया है, जिसे मानना आयोजकों के लिए अनिवार्य है।
प्रमुख शर्तें जिन पर प्रशासन की पैनी नजर है:
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भड़काऊ भाषण पर रोक: किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय या भाषा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की जाएगी।
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राजनीतिक मर्यादा: किसी भी राजनीतिक दल या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के विरुद्ध अमर्यादित भाषा का प्रयोग वर्जित है।
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यातायात और शोर: ध्वनि प्रदूषण के मानकों का पालन करना होगा और मुख्य मार्ग पर यातायात बाधित नहीं होना चाहिए।
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सुरक्षा: कार्यक्रम स्थल पर हथियार, आतिशबाजी और हर्ष फायरिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
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नाबालिगों का उपयोग: किसी भी विवादित नारेबाज़ी में बच्चों या नाबालिगों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
नोट: अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी भी एक शर्त का उल्लंघन पाया गया, तो कार्यक्रम की अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी।
🛡️ सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम और भारी निवेश
आयोजन की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त (मध्य) विक्रांत वीर के नेतृत्व में आशियाना, पीजीआई और कृष्णानगर पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
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सुरक्षा बल: आयोजन स्थल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में पर्याप्त पुलिस बल और पीएसी (PAC) तैनात की गई है।
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आयोजन शुल्क: आयोजकों ने इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए स्मारक प्रबंध समिति को लगभग 4.50 लाख रुपये का शुल्क भी जमा किया है।
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मैदान की स्थिति: हालांकि अभियान को लेकर उत्साह देखा गया, लेकिन बुधवार सुबह कार्यक्रम की शुरुआत में मैदान में काफी कुर्सियां खाली भी नजर आईं, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा रही।
🧐 क्या है ‘गो-प्रतिष्ठा’ की मांग का भविष्य?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह अभियान न केवल धार्मिक है, बल्कि इसके गहरे सामाजिक और राजनीतिक मायने भी हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहाँ पहले से ही गोवंश संरक्षण के लिए कड़े कानून हैं, वहाँ केंद्र स्तर पर ‘राष्ट्रमाता’ के दर्जे की मांग एक नई बहस को जन्म दे रही है।
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