लखनऊ. उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने वालों के खिलाफ योगी सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में जनपद अमरोहा की नगर पालिका परिषद गजरौला में तैनात एक कर लिपिक (Tax Clerk) के काले कारनामों का खुलासा हुआ है। शासन की जांच रिपोर्ट में लिपिक की हाईस्कूल की अंकतालिका फर्जी पाई गई है, जिसके बाद नगर पालिका प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, अजय कुमार नामक कर्मचारी वर्ष 1989 में नगर पालिका परिषद गजरौला में एक दैनिक कर्मचारी (Daily Wager) के रूप में भर्ती हुए थे। उन्होंने उस समय अपने सेवा अभिलेखों में दावा किया था कि उन्होंने वर्ष 1983 में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की है।
हालांकि, समय का पहिया घूमा और जब शासन स्तर पर इनके दस्तावेजों की गहनता से जांच हुई, तो सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत निकली।
यूपी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति: matribhumisamachar.com/category/uttar-pradesh
असली खेल: फेल हुए और फिर बनवा लिया फर्जी सर्टिफिकेट
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं:
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असफलता छिपाई: जांच में पता चला कि अजय कुमार ने वर्ष 1983 में ही गजरौला के ज्ञान भारती इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की परीक्षा दी थी, लेकिन वे उसमें फेल हो गए थे।
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दस्तावेजों का जाल: अपनी विफलता छुपाने के लिए उन्होंने कथित तौर पर फर्जी अंकतालिका का सहारा लिया।
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स्थायी नियुक्ति का दांव: बाद में उन्होंने वर्ष 2004 में ‘बोर्ड ऑफ हायर एजुकेशन’ से हाईस्कूल और 2006 में इंटरमीडिएट के नए प्रमाणपत्र पेश किए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वर्ष 2011 में विभाग ने उन्हें स्थायी कर्मचारी बना दिया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान: matribhumisamachar.com/tag/corruption-news
विधायक की शिकायत और शासन का कड़ा एक्शन
इस मामले को लेकर क्षेत्रीय विधायक राजीव तरारा ने शासन स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके साथ ही नगर पालिका के कुछ जागरूक सभासदों ने भी इस फर्जीवाड़े के खिलाफ आवाज बुलंद की थी।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए शासन ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के नेतृत्व में एक विशेष जांच कमेटी गठित की। कमेटी की स्क्रूटनी में नौकरी के समय प्रस्तुत की गई अंकतालिका प्रथम दृष्टया ही अवैध और फर्जी पाई गई।
प्रशासनिक कार्रवाई: निलंबन और विभागीय जांच
जांच रिपोर्ट मिलते ही नगर पालिका प्रशासन में हड़कंप मच गया। अधिशासी अधिकारी (EO) ललित आर्य ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लिपिक अजय कुमार को निलंबित कर दिया है।
EO ललित आर्य का बयान:
“शासन की जांच में लिपिक के शैक्षणिक अभिलेख सही नहीं पाए गए हैं। कमेटी ने अंकतालिका को फर्जी करार दिया है। फिलहाल कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया गया है और उन्हें स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी किया गया है। जवाब आने के बाद सेवा समाप्ति और कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।”
अमरोहा-गजरौला स्थानीय समाचार: matribhumisamachar.com/category/amroha
क्या हो सकती है कानूनी सजा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो आरोपी पर निम्नलिखित कार्रवाई हो सकती है:
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सेवा समाप्ति: तत्काल प्रभाव से सरकारी नौकरी से बर्खास्तगी।
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वसूली: अब तक लिए गए वेतन और भत्तों की सरकारी खजाने में वापसी।
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FIR: जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं (IPC/BNS) के तहत पुलिस केस।
निष्कर्ष: यह मामला उन सभी के लिए एक सबक है जो गलत रास्तों से सरकारी तंत्र में घुसपैठ करते हैं। डिजिटल युग में अब पुराने दस्तावेजों का सत्यापन भी बेहद आसान और सटीक हो गया है।
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