लखनऊ | शनिवार, 11 अप्रैल 2026
लखनऊ स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ में शुक्रवार (10 अप्रैल) को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला अपने मासूम बच्चे के साथ पांचवीं मंजिल की छत पर जा पहुंची। रोती-बिलखती मां ने नीचे कूदने की धमकी दी, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों और वकीलों ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित नीचे उतारा। अब इस मामले में गैंगरेप, जबरन धर्मांतरण और रसूखदारों के संरक्षण के सनसनीखेज खुलासों ने इसे राज्य का सबसे संवेदनशील मुद्दा बना दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मूल रूप से गोंडा की रहने वाली पीड़िता का आरोप है कि उसे शादी का झांसा देकर अगवा किया गया था। महिला के अनुसार, उसे लंबे समय तक बंधक बनाकर कई लोगों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) किया। इसी प्रताड़ना के दौरान उसने एक बच्चे को जन्म दिया। पीड़िता का दावा है कि आरोपियों ने न केवल उसका शारीरिक शोषण किया, बल्कि उस पर जबरन धर्म परिवर्तन का भी भारी दबाव बनाया।
मामले में आए 5 बड़े मोड़
-
मासूम बच्चे को ढाल बनाया: पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब उसने विरोध किया, तो आरोपियों ने उसके बच्चे को छत से नीचे फेंकने की धमकी दी। कोर्ट परिसर में भी महिला इसी डर और न्याय न मिलने की हताशा में छत पर चढ़ी थी।
-
ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप: महिला ने स्थानीय ग्राम प्रधान और अन्य प्रभावशाली लोगों पर आरोपियों को संरक्षण देने और पुलिसिया कार्रवाई में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
-
सुरक्षा में सेंध: हाईकोर्ट परिसर की छत पर महिला के पहुंच जाने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अवध बार एसोसिएशन (OBA) ने इस संबंध में वरिष्ठ न्यायाधीश को पत्र लिखकर सुरक्षा कड़ी करने और छतों पर जाल लगाने की मांग की है।
-
धर्मांतरण का एंगल: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह है जो जबरन धर्मांतरण और शोषण के सिंडिकेट से जुड़ा है।
-
हाईकोर्ट का कड़ा रुख: अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन से तत्काल काउंटर एफिडेविट (जवाब) तलब किया है।
प्रशासनिक अपडेट और वर्तमान स्थिति
घटना के बाद लखनऊ पुलिस और प्रशासन में हलचल तेज है। अधिकारियों का कहना है:
-
मेडिकल और सुरक्षा: पीड़िता और उसके बच्चे को कड़ी सुरक्षा में रखा गया है और उनका मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है।
-
FIR और गिरफ्तारी: पीड़िता के बयानों के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ग्राम प्रधान और मुख्य आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है।
-
जांच कमेटी: इस बात की भी जांच की जा रही है कि पूर्व में की गई शिकायतों पर स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की।
विशेषज्ञ की राय: कानूनी जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के सख्त ‘गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध कानून’ के तहत यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो दोषियों को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और न्याय प्रणाली की अग्निपरीक्षा बन गया है।
लेटेस्ट अपडेट के लिए बने रहें।
Matribhumisamachar


