नई दिल्ली. भारत में अमेरिका के नवनियुक्त राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने आधिकारिक तौर पर अपना कार्यभार संभाल लिया है। अपनी नई भूमिका की शुरुआत करते हुए उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया है। गोर ने विशेष रूप से अमेरिका के नेतृत्व वाली वैश्विक पहल ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) में भारत को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम है। सर्जियो गोर की नियुक्ति और ‘पैक्स सिलिका’ पहल में भारत की भागीदारी भविष्य की तकनीक और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
राजदूत सर्जियो गोर की नई भूमिका और चुनौतियां
अक्टूबर 2025 में अमेरिकी सीनेट की मंजूरी के बाद, सर्जियो गोर ने नवंबर 2025 में शपथ ली थी। भारत पहुंचने पर उन्होंने दोनों देशों के साझा भविष्य के लिए “अतुलनीय अवसरों” की बात की।
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ट्रंप के करीबी सहयोगी: गोर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अत्यंत विश्वासपात्र माना जाता है।
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विशेष जिम्मेदारी: राजदूत के साथ-साथ उनके पास दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत का अतिरिक्त प्रभार भी है।
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आर्थिक कूटनीति: उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब व्यापार शुल्क (Tariff) को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ खींचतान चल रही है। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे अपने प्रभाव का उपयोग कर इन तनावों को कम करेंगे।
क्या है ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) पहल?
यह अमेरिका द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी रणनीतिक योजना है, जिसका लक्ष्य भविष्य की तकनीकों के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय वैश्विक नेटवर्क तैयार करना है।
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मुख्य फोकस: इसका प्राथमिक उद्देश्य एक ऐसी सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है जो किसी एक देश पर निर्भर न हो और नवाचार से प्रेरित हो।
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विस्तृत दायरा: यह पहल केवल सेमीकंडक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा इनपुट, उन्नत विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।
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प्रमुख सदस्य: वर्तमान में जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूके, इज़राइल, यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देश इसके सदस्य हैं।
भारत के शामिल होने के मायने
सर्जियो गोर ने घोषणा की है कि अगले महीने भारत को आधिकारिक तौर पर पूर्ण सदस्य के रूप में आमंत्रित किया जाएगा।
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AI और सेमीकंडक्टर: भारत का इस समूह में शामिल होना एआई और चिप निर्माण के क्षेत्र में भारत को वैश्विक केंद्र (Global Hub) बनाने में मदद करेगा।
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सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला: चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने के पश्चिमी प्रयासों में भारत एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरेगा।
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रणनीतिक बढ़त: पूर्ण सदस्यता मिलने से भारत को महत्वपूर्ण खनिजों और अत्याधुनिक विनिर्माण तकनीकों तक आसान पहुंच प्राप्त होगी।
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