तेहरान. मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ा राजनीतिक मोड़ आया है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के 13वें दिन, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। अपने पिता अली खामेनेई के निधन के बाद पद संभालने वाले मोजतबा का यह पहला आधिकारिक संबोधन है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
पड़ोसी देशों की ओर दोस्ती का हाथ
मोजतबा खामेनेई ने अपने संदेश में एक सधा हुआ कूटनीतिक रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती, शांति और सहयोग के सिद्धांत पर चलना चाहता है।” उन्होंने क्षेत्रीय देशों को आश्वस्त किया कि ईरान की सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य किसी भी पड़ोसी मुल्क को नुकसान पहुँचाना नहीं है। विश्लेषक इसे खाड़ी देशों (जैसे सऊदी अरब और यूएई) को युद्ध से दूर रखने की एक कोशिश मान रहे हैं।
अमेरिका को सीधी चेतावनी: “ठिकाने निशाने पर”
शांति की बात के साथ-साथ मोजतबा ने कड़ा सैन्य संदेश भी दिया। उन्होंने दावा किया कि ईरान की मिसाइलें और ड्रोन केवल उन अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, जो पड़ोसी देशों की धरती से ईरान के खिलाफ काम कर रहे हैं।
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उद्देश्य: खामेनेई के अनुसार, ये हमले अमेरिकी हस्तक्षेप का जवाब हैं।
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रणनीति: ईरान इस युद्ध को “इजरायल बनाम ईरान” के साथ-साथ “क्षेत्रीय संप्रभुता बनाम अमेरिकी हस्तक्षेप” के रूप में पेश कर रहा है।
जमीनी हकीकत: तेल और नागरिक ठिकानों पर हमले
भले ही आधिकारिक संदेश में ‘सटीक हमलों’ की बात कही गई हो, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट्स कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। पिछले 48 घंटों में:
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तेल प्रतिष्ठान: ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों और इजरायल के तटीय इलाकों में तेल रिफाइनरियों पर हमले की खबरें हैं।
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नागरिक हताहत: लेबनान और ईरान के सीमावर्ती इलाकों में नागरिक बस्तियों को भारी नुकसान पहुँचा है।
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आर्थिक प्रभाव: हमलों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं।
क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक चिंता
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई का यह संदेश ‘दोधारी तलवार’ जैसा है। एक तरफ वे पड़ोसियों को शांत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण जलमार्गों पर दबाव बनाए हुए हैं। यदि यह युद्ध अगले कुछ हफ्तों तक और खिंचा, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत सहित पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को महंगाई का झटका दे सकता है।
क्या मोजतबा का नेतृत्व युद्ध को रोक पाएगा?
पूरी दुनिया की नजरें अब इजरायल के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या इजरायल, मोजतबा के इस “दोस्ती वाले संदेश” पर भरोसा करेगा या जवाबी हमलों की तीव्रता बढ़ाएगा? फिलहाल, मध्य पूर्व एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ एक छोटी सी गलती ‘तीसरे विश्व युद्ध’ की आहट दे सकती है।
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