चंडीगढ़ | बुधवार, 12 अगस्त 2026
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह से जुड़े बहुचर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत में कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा राम रहीम को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई स्वीकार कर ली है। इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर कानूनी और जन-चर्चा के केंद्र में आ गया है।
क्या है पूरा मामला और 2002 की घटना?
यह मामला वर्ष 2002 का है, जब सिरसा से प्रकाशित हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘पूरा सच’ के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर गोलियों से भून दिया गया था। गंभीर रूप से घायल छत्रपति की बाद में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी।
रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार के जरिए डेरा सच्चा सौदा के भीतर चल रही संदिग्ध गतिविधियों और साधवियों के यौन शोषण से जुड़ी गुमनाम चिट्ठी को प्रमुखता से छापा था। हत्या की निष्पक्ष जांच के लिए मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया था।
2002 से 2026 तक: कानूनी लड़ाई का पूरा घटनाक्रम
इस ऐतिहासिक कानूनी प्रक्रिया की समय-सारिणी इस प्रकार है:
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई स्वीकार होने के क्या मायने हैं?
शीर्ष अदालत द्वारा याचिका स्वीकार किए जाने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि राम रहीम को फिर से दोषी ठहरा दिया गया है।
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कानूनी समीक्षा: इसका सीधा मतलब यह है कि सर्वोच्च न्यायालय अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मार्च 2026 वाले बरी करने के आदेश की वैधानिकता, प्रक्रियात्मक पहलुओं और साक्ष्यों की गहन समीक्षा करेगा।
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राज्य की अपील न होने का पहलू: सुनवाई के दौरान राम रहीम के पक्ष ने तर्क दिया कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले को चुनौती नहीं दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित परिवार की याचिका के अधिकार को स्वीकार करते हुए सुनवाई आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या सुप्रीम कोर्ट के याचिका स्वीकार करने से राम रहीम फिर से दोषी हो गए हैं?
नहीं, याचिका स्वीकार होने का मतलब केवल इतना है कि अदालत अब हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले पर पुनर्विचार और कानूनी समीक्षा करेगी।
2. रामचंद्र छत्रपति कौन थे और उनकी हत्या क्यों हुई थी?
रामचंद्र छत्रपति ‘पूरा सच’ अखबार के संपादक थे। उन्होंने डेरा सच्चा सौदा से जुड़ी खबरों और गुमनाम पत्रों को निर्भीकता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद 2002 में उनकी हत्या कर दी गई थी।
3. हाईकोर्ट ने राम रहीम को कब बरी किया था?
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में विशेष सीबीआई अदालत के 2019 के फैसले को पलटते हुए राम रहीम को बरी कर दिया था।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख उपलब्ध कानूनी सूचनाओं, अदालती आदेशों और समाचार रिपोर्टों के आधार पर केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। मामला वर्तमान में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन (Sub-judice) है।
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