तेहरान. ईरान में इस्लामिक शासन के खिलाफ भड़की विद्रोह की आग अब बेकाबू हो चुकी है। पिछले दो हफ्तों से जारी प्रदर्शनों में हिंसा इस कदर बढ़ गई है कि मरने वालों का आधिकारिक अनुमानित आंकड़ा 648 के पार पहुंच गया है। मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि देश में इंटरनेट पूरी तरह ठप है और अस्पतालों से जानकारी बाहर नहीं आ पा रही है।
1. मरने वालों में मासूम बच्चे भी शामिल
नॉर्वे स्थित ‘ईरान मानवाधिकार’ (IHR) के अनुसार, अब तक की हिंसा में कम से कम 648 लोग मारे गए हैं, जिनमें 9 नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलाई हैं। तेहरान के कहरीज़क मुर्दाघर (Kahrizak morgue) से आए वीडियो में दर्जनों शवों को बॉडी बैग्स में देखा जा सकता है, जो स्थिति की भयावहता को बयां कर रहे हैं।
2. 10,000 से ज्यादा गिरफ्तार, ‘Enemy of God’ का खतरा
ईरानी सुरक्षाबलों ने अब तक 10,700 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। ईरान के अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनों में शामिल होने वालों पर ‘मोहारेबेह’ (ईश्वर के खिलाफ युद्ध) का आरोप लगाया जाएगा, जिसकी सजा मौत है। प्रदर्शनकारियों को सामूहिक फांसी दिए जाने का डर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जताया जा रहा है।
3. ट्रंप की ‘टैरिफ वॉर’ और सैन्य दखल के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में हो रहे दमन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका 25% टैरिफ लगाएगा। इसके अलावा, ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर हिंसा नहीं रुकी तो वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की रक्षा के लिए सैन्य शक्ति का उपयोग कर सकते हैं।
4. 1979 के बाद सबसे बड़ी क्रांति
विशेषज्ञों का मानना है कि यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा जनांदोलन है। इस बार लोग केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनों का असर कच्चे तेल के बाजार पर भी दिख रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है।
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