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कानपुर के एलन हाउस पब्लिक स्कूल में संवेदनहीनता: ‘गुड मॉर्निंग’ न कहने पर 23 बच्चों को मिली तालिबानी सजा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर. महाराजपुर क्षेत्र के प्रतिष्ठित एलन हाउस पब्लिक स्कूल से संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ कक्षा 4 के 23 मासूम बच्चों को सिर्फ इसलिए दो घंटे तक हाथ ऊपर करके (हैंड्स अप) क्लास के बाहर खड़ा रखा गया, क्योंकि उन्होंने शिक्षक के आने पर ‘गुड मॉर्निंग’ नहीं बोला था। इस घटना के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

घटना मंगलवार की बताई जा रही है। सैनिक नगर निवासी व्यवसायी जितेन्द्र सिंह के अनुसार, उनके दो बच्चे (समर्थ और महिमा) चौथी कक्षा में पढ़ते हैं। कक्षा में शिक्षक ऋषभ के प्रवेश करने पर बच्चों ने अभिवादन नहीं किया, जिससे नाराज होकर शिक्षक ने पूरी क्लास के 23 बच्चों को सजा के तौर पर कमरे से बाहर निकाल दिया।

प्रधानाचार्या के जाते ही फिर दी सजा

अभिभावकों का आरोप है कि सजा के दौरान बच्चे दर्द से कराहते रहे और बैठने की गुहार लगाते रहे, लेकिन शिक्षक का दिल नहीं पसीजा। इसी बीच स्कूल की प्रधानाचार्या करुणा शेष पाल वहां से गुजरीं और बच्चों को देख उन्हें वापस सीट पर बिठाया। हालांकि, आरोप है कि प्रधानाचार्या के जाते ही शिक्षक ने दोबारा बच्चों को बाहर निकाल दिया और फिर से हाथ ऊपर कराकर खड़ा कर दिया।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

बच्चों ने घर आकर डरे-सहमे होने के कारण कुछ नहीं बताया, लेकिन अन्य अभिभावकों के फोन आने पर जितेन्द्र सिंह को मामले की जानकारी हुई। उन्होंने तुरंत महाराजपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

  • पुलिस का बयान: महाराजपुर इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने बताया कि शिकायत प्राप्त हो गई है। शुक्रवार को स्कूल खुलने पर प्रबंधन और आरोपी शिक्षक को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

  • स्कूल का पक्ष: इस मामले में अभी तक प्रधानाचार्या या स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

शिक्षा जगत में आक्रोश

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला RTE एक्ट की धारा 17 का सीधा उल्लंघन है, जो स्कूलों में किसी भी प्रकार के शारीरिक या मानसिक दंड को प्रतिबंधित करती है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या बच्चों को जानबूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।