लखनऊ. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव, जिन्हें उनके परिजन लापता समझ रहे थे, उन्हें बाराबंकी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार सुबह तक जिस मामले को ‘गुमशुदगी’ माना जा रहा था, वह अंततः एक आपराधिक मुकदमे में गिरफ्तारी का मामला निकला।
घर से निकले थे तिलक में, पहुँच गए जेल
मनोज यादव गुरुवार (12 फरवरी) की शाम लखनऊ स्थित अपने घर से काकोरी में एक चचेरी बहन के तिलक समारोह और अन्य शादियों में शामिल होने के लिए निकले थे। जब देर रात तक वे घर नहीं लौटे और उनसे संपर्क नहीं हो पाया, तो उनकी पत्नी प्रभा ने शुक्रवार सुबह लखनऊ के गोमती नगर विस्तार थाने में उनके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई।
जांच में खुली पोल
लखनऊ पुलिस ने जब मामले की छानबीन शुरू की और सर्विलांस का सहारा लिया, तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। गोमती नगर विस्तार के इंस्पेक्टर सुधीर अवस्थी के अनुसार, मनोज यादव को बाराबंकी की सफदरगंज पुलिस ने एक पुराने विवाद से जुड़े नए मुकदमे में गिरफ्तार किया था।
क्या है पूरा मामला?
गिरफ्तारी की जड़ें एक पुराने आपसी विवाद से जुड़ी हैं:
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शिकायतकर्ता: सफदरगंज के भगोलापुरवा की निवासी कलावती ने 11 फरवरी को मनोज यादव के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
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आरोप: कलावती का आरोप है कि मनोज ने उनके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया और उन्हें व उनके बेटे को जान से मारने की धमकी दी।
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पुराना विवाद: बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच साल 2004 से मारपीट का एक मुकदमा चल रहा है, जिसे लेकर 11 फरवरी को फिर से विवाद हुआ था।
पुलिस की कार्रवाई
बाराबंकी के एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपों की प्राथमिक जांच सही पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। शुक्रवार को पुलिस ने बड़ागांव सीएचसी में प्रवक्ता का मेडिकल परीक्षण कराया, जिसके बाद उन्हें बाराबंकी कोर्ट में पेश किया जा रहा है।
ताजा स्थिति: सपा प्रवक्ता की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। पुलिस अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है।
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