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पप्पू यादव को बड़ी राहत: पटना MP-MLA कोर्ट ने दी जमानत, जल्द होंगे जेल से रिहा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. बिहार की राजनीति के दिग्गज और पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के लिए शुक्रवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। पटना स्थित एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज तीन अलग-अलग मामलों में जमानत याचिका मंजूर कर ली है। इस फैसले के साथ ही पिछले कुछ दिनों से जारी उनकी न्यायिक हिरासत का अंत हो गया है।

कोर्ट में हुई तीखी बहस

शुक्रवार को विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच जोरदार बहस हुई:

  • बचाव पक्ष: पप्पू यादव के वकीलों ने तर्क दिया कि जिन मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया गया है, वे काफी पुराने हैं और उनके आरोपों की प्रकृति इतनी गंभीर नहीं है कि उन्हें जेल में रखा जाए। साथ ही, यह भी दलील दी गई कि सांसद होने के नाते उन्हें अपने क्षेत्र की जनता के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करना है।

  • अभियोजन पक्ष: सरकारी वकील ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि कानून की नजर में सभी समान हैं और मामलों की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए आरोपी की हिरासत जरूरी है।

कोतवाली थाना कांडों से जुड़ा है मामला

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। मिली जानकारी के अनुसार, ये मामले पटना के कोतवाली थाना और अन्य थाना क्षेत्रों से संबंधित हैं, जो अलग-अलग समय पर विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए थे। कोर्ट ने कुछ निश्चित शर्तों के साथ उनकी रिहाई का आदेश दिया है।

समर्थकों में जश्न, राजनीतिक हलचल तेज

जमानत की खबर मिलते ही कोर्ट परिसर के बाहर और पप्पू यादव के आवास पर समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और इसे “न्याय की जीत” करार दिया।

राजनीतिक मायने:

विशेषज्ञों का मानना है कि जेल से बाहर आने के बाद पप्पू यादव एक बार फिर सड़क पर उतरकर अपनी सक्रियता बढ़ाएंगे। आगामी चुनावों और राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, उनकी रिहाई को काफी अहम माना जा रहा है।

अगली प्रक्रिया:

अदालत की कागजी कार्रवाई पूरी होते ही पप्पू यादव को बेऊर जेल से रिहा कर दिया जाएगा। उनके समर्थकों द्वारा एक बड़े स्वागत समारोह की तैयारी की जा रही है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।