नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला हमेशा ही हाई-वोल्टेज रहता है, लेकिन इस बार मैदान के बाहर एक नई जंग छिड़ गई है। इंग्लैंड की मशहूर क्रिकेट लीग ‘द हंड्रेड’ (The Hundred) की हालिया नीलामी ने भारतीय क्रिकेट गलियारों में हलचल मचा दी है। विवाद की जड़ है आईपीएल (IPL) फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के मालिकों द्वारा एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को अपनी विदेशी टीम में शामिल करना।
क्या है पूरा मामला?
‘द हंड्रेड’ लीग के आगामी सीजन के लिए हुई नीलामी में पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद (Abrar Ahmed) को सनराइजर्स लीड्स (Sunrisers Leeds) ने करीब 2.34 करोड़ रुपये (£225,000 के करीब) की भारी-भरकम राशि में खरीदा है।
सनराइजर्स लीड्स का मालिकाना हक उसी समूह के पास है जिसके पास आईपीएल की सनराइजर्स हैदराबाद टीम है, जिसकी कमान काव्या मारन संभालती हैं। जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर आई, फैंस के बीच बहस छिड़ गई। कई लोग इसे ‘व्यापारिक फैसला’ बता रहे हैं, तो कुछ इसे भारतीय भावनाओं के खिलाफ मान रहे हैं।
BCCI का कड़ा रुख: “हमारा दखल केवल IPL तक”
इस बढ़ते विवाद पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बीसीसीआई किसी निजी फ्रेंचाइजी के विदेशी निवेश या खिलाड़ियों के चयन में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
राजीव शुक्ला का बयान: “हम केवल आईपीएल का संचालन और नियंत्रण करते हैं। किसी फ्रेंचाइजी ने दक्षिण अफ्रीका, यूएई या इंग्लैंड की लीग में किस खिलाड़ी को साइन किया, यह उनके अपने व्यावसायिक विवेक पर निर्भर करता है। विदेशी लीगों में बीसीसीआई का कोई कानूनी अधिकार क्षेत्र नहीं है।”
नीलामी का गणित: क्यों अबरार अहमद पर लगी बोली?
नीलामी से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि भारतीय मालिकाना हक वाली टीमें (जैसे सनराइजर्स, मुंबई इंडियंस या दिल्ली कैपिटल्स की सिस्टर टीमें) पाकिस्तानी खिलाड़ियों से दूरी बनाए रखेंगी। शुरुआती दौर में ऐसा दिखा भी:
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अनसोल्ड स्टार्स: हारिस रऊफ, शादाब खान और सईम अयूब जैसे दिग्गजों को किसी ने नहीं खरीदा।
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अबरार की डिमांड: जब मिस्ट्री स्पिनर अबरार अहमद का नाम आया, तो सनराइजर्स लीड्स और ट्रेंट रॉकेट्स के बीच जबरदस्त ‘बिडिंग वॉर’ देखने को मिली। अंततः सनराइजर्स ने बाजी मारी।
विवाद के पीछे की भावनाएं
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट संबंध 2019 के पुलवामा हमले के बाद से पूरी तरह ठप हैं। आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खेलने पर आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है, लेकिन फ्रेंचाइजी उन्हें ‘अघोषित’ तौर पर नहीं खरीदती हैं। ऐसे में जब किसी भारतीय कंपनी से जुड़ी टीम विदेश में पाकिस्तानी खिलाड़ी को मोटा पैसा देती है, तो राष्ट्रवाद और खेल के बीच की लकीर धुंधली हो जाती है।
ग्लोबल क्रिकेट का बदलता स्वरूप
यह पहली बार नहीं है जब ऐसा विवाद हुआ है। इससे पहले दक्षिण अफ्रीका की SA20 और यूएई की ILT20 में भी भारतीय मालिकों वाली टीमों ने विदेशी खिलाड़ियों को साइन किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि:
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ग्लोबल बिजनेस: फ्रेंचाइजी अब केवल भारतीय टीमें नहीं रहीं, वे ग्लोबल स्पोर्ट्स ब्रांड बन चुकी हैं।
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प्रतिभा की तलाश: जीत दर्ज करने के लिए टीमें दुनिया भर के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को अपनी टीम में चाहती हैं।
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कानूनी पेच: इंग्लैंड की धरती पर हो रही लीग में भारतीय बोर्ड के नियम लागू नहीं होते।
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