रायपुर | सोमवार, 13 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) में शनिवार को कथित मतांतरण की कोशिशों को लेकर भारी बवाल हो गया। अस्पताल के वार्डों में मरीजों को ‘बेहतर इलाज और ईश्वरीय शक्ति’ का हवाला देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का मामला सामने आया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह ईसाई मिशनरी से जुड़ी तीन संदिग्ध महिलाएं अस्पताल परिसर के भीतर मरीजों और उनके परिजनों से संपर्क कर रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि ये महिलाएं गंभीर रूप से बीमार मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लालच दे रही थीं और उन्हें एक विशेष धर्म की प्रार्थनाओं से ठीक होने का दावा कर रही थीं।
विवाद तब बढ़ा जब एक जागरूक मरीज ने इन महिलाओं की संदिग्ध गतिविधियों का वीडियो बना लिया और इसे स्थानीय हिंदू संगठनों (बजरंग दल) को भेज दिया। सूचना मिलते ही संगठन के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे, लेकिन हंगामा होते देख आरोपी महिलाएं वहां से भाग निकलीं।
हनुमान चालीसा का पाठ और विरोध
कार्यकर्ताओं ने करीब आधे घंटे तक अस्पताल के चप्पे-चप्पे में महिलाओं की तलाश की। महिलाओं के न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर के बाहर स्थित मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया। संगठन ने अस्पताल प्रबंधन पर सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया और मांग की कि सरकारी संस्थानों का उपयोग धार्मिक प्रचार के लिए करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
छत्तीसगढ़ का नया कानून: अब और भी सख्त हुई सजा
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा ने हाल ही में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पारित किया है। इस नए कानून के तहत मतांतरण से जुड़े नियमों को बेहद कड़ा कर दिया गया है:
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प्रलोभन की नई परिभाषा: अब मुफ्त चिकित्सा सुविधा, बेहतर जीवनशैली का वादा या शिक्षा का लालच देना भी अवैध मतांतरण की श्रेणी में आता है।
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कड़ी सजा: लालच या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराने पर 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
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सामूहिक मतांतरण: यदि दो या दो से अधिक व्यक्तियों का एक साथ मतांतरण कराया जाता है, तो आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
प्रशासनिक कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
अस्पताल प्रबंधन ने सुरक्षा कर्मियों को भविष्य में ऐसी किसी भी गतिविधि पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस प्रशासन का बयान: “हमें शिकायत प्राप्त हुई है और वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि महिलाओं की पहचान की जा सके। तथ्यों की पुष्टि होते ही नए कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।”
फिलहाल अस्पताल में स्थिति सामान्य है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
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