मुंबई | सोमवार, 13 अप्रैल 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब यह खबर सामने आई कि राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के एक विमान हादसे (28 जनवरी, 2026) में हुए आकस्मिक निधन के बाद, राजकीय शोक के दौरान महज 3-4 दिनों के भीतर 75 शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा (Minority Status) दे दिया गया।
आरोप है कि जिस समय पूरा राज्य शोक में था, मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर फाइलों को ‘रॉकेट’ की रफ्तार से आगे बढ़ाया। रिकॉर्ड के मुताबिक, पहला सर्टिफिकेट 28 जनवरी को दोपहर 3:09 बजे जारी किया गया था।
अजित पवार और विभाग से जुड़ाव
अजित पवार के पास अल्पसंख्यक विकास विभाग का प्रभार था। उनकी मृत्यु के बाद अब यह विभाग उनकी पत्नी और वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार संभाल रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि प्रभावशाली संस्थानों ने अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर इस प्रशासनिक शून्यता का फायदा उठाया।
विवाद के 3 बड़े कारण:
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नियमों की अनदेखी: कई संस्थान पात्रता मानकों को पूरा नहीं करते थे।
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RTE से बचने की जुगत: अल्पसंख्यक दर्जा मिलते ही स्कूलों को RTE (शिक्षा का अधिकार) के तहत 25% सीटों पर गरीब बच्चों को प्रवेश देने की अनिवार्यता से छूट मिल जाती है।
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भ्रष्टाचार के आरोप: विधायक रोहित पवार और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि हर सर्टिफिकेट के लिए करीब 25 लाख रुपये की रिश्वत ली गई।
सरकार का कड़ा एक्शन: अब तक क्या हुआ?
विवाद के राजनीतिक रूप से गरमाने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त कदम उठाए हैं:
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दर्जे पर स्टे: सभी 75 संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे को फिलहाल ‘एबेयंस’ (Abeyance) यानी स्थगित कर दिया गया है।
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अधिकारी पर गाज: अल्पसंख्यक विकास विभाग के उप सचिव मिलिंद शेनॉय, जिनके डिजिटल हस्ताक्षर से ये सर्टिफिकेट जारी हुए थे, उनका तबादला कर दिया गया है।
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उच्च स्तरीय जांच: IAS बी. वेणुगोपाल रेड्डी इस पूरे मामले की समीक्षा कर रहे हैं। रिपोर्ट आने तक नई प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी गई है।
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RTE कोटा लागू: सरकार ने आदेश दिया है कि जिन संस्थानों का दर्जा लटका हुआ है, उन्हें इस साल 25% RTE कोटा के तहत प्रवेश देना होगा।
मुख्य बिंदु:
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 75 शैक्षणिक संस्थानों को दिए गए अल्पसंख्यक दर्जे पर तत्काल रोक लगाई।
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विवाद का केंद्र: पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तुरंत बाद शोक काल के दौरान बांटे गए सर्टिफिकेट।
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मामले की जांच के लिए वरिष्ठ IAS अधिकारी बी. वेणुगोपाल रेड्डी की अध्यक्षता में समिति गठित।
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भ्रष्टाचार के आरोप: विपक्ष ने प्रति सर्टिफिकेट 25 लाख रुपये के लेनदेन का लगाया संगीन आरोप।
आगे की राह
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई भी गड़बड़ी पाई गई, तो संबंधित संस्थानों की मान्यता स्थायी रूप से रद्द की जाएगी और दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। फिलहाल, राज्य की सियासत में यह मुद्दा ‘शिक्षा के भगवाकरण बनाम भ्रष्टाचार’ की नई बहस छेड़ चुका है।
Matribhumisamachar


