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TCS नासिक मामला: महिला कर्मचारियों के शोषण और धर्मांतरण पर SIT जांच में चौंकाने वाले खुलासे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

मुंबई | सोमवार, 13 अप्रैल 2026 देश की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक शाखा से जुड़ा विवाद गहराता जा रहा है। कंपनी ने यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोपों में घिरे अपने कर्मचारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया है। वहीं, पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें कंपनी की एक महिला एचआर मैनेजर भी शामिल है।

SIT जांच और अब तक की गिरफ्तारियां

नासिक पुलिस द्वारा गठित SIT इस पूरे प्रकरण की कड़ियां जोड़ रही है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार:

  • कुल 9 एफआईआर: मामले में अब तक अलग-अलग धाराओं के तहत 9 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं।

  • 7 आरोपी गिरफ्तार: पुलिस ने कंपनी की असिस्टेंट जनरल मैनेजर (HR) समेत सात लोगों को हिरासत में लिया है। महिला एचआर पर आरोप है कि उन्होंने पीड़ितों की शिकायतों को नजरअंदाज किया और उन्हें “चुप रहने” की सलाह दी।

  • मुख्य आरोपी फरार: मामले का एक अन्य मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश के लिए टीमें छापेमारी कर रही हैं।

TCS का कड़ा रुख: ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इस घटना को “बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक” बताया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि:

  1. निलंबन: जांच के घेरे में आए सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

  2. आंतरिक समिति: टीसीएस की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) आरती सुब्रमण्यन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय आंतरिक जांच समिति गठित की गई है।

  3. सहयोग: कंपनी स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और SIT के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है।

क्या हैं आरोप? शोषण से धर्मांतरण तक का खेल

पीड़ित महिला कर्मचारियों ने पुलिस को दिए अपने बयानों में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं:

  • यौन और मानसिक शोषण: पिछले 4 वर्षों से टीम लीडर्स और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा महिला कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा था।

  • जबरन धर्मांतरण का दबाव: पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उन्हें नमाज पढ़ने, प्रतिबंधित मांस खाने और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया।

  • धार्मिक भावनाओं को ठेस: एक पुरुष कर्मचारी ने भी शिकायत दर्ज कराई है कि उसे पिछले दो वर्षों से धर्मांतरण के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।

कॉर्पोरेट जगत और राजनीति में हलचल

इस घटना ने पूरे आईटी सेक्टर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • श्रम मंत्रालय का हस्तक्षेप: आईटी कर्मचारी संगठन ‘NITES’ ने केंद्रीय श्रम मंत्रालय से मांग की है कि टीसीएस समेत सभी बड़ी कंपनियों में POSH (Prevention of Sexual Harassment) नियमों के अनुपालन का ऑडिट किया जाए।

  • राजनीतिक प्रतिक्रिया: महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का आश्वासन दिया है। वहीं, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने भी तेलंगाना और अन्य राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को आईटी सेक्टर में कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

निष्कर्ष: यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने ‘वर्कप्लेस कल्चर’ और महिला सुरक्षा के गंभीर मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। पुलिस का दावा है कि SIT की जांच पूरी होने पर और भी कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।