कानपुर. उत्तर प्रदेश के घाटमपुर तहसील के जहांगीराबाद गांव में सरकारी जमीन को हड़पने के एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है। तहसील के अभिलेखागार में प्राइवेट रूप से कार्यरत एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर, तहसील कर्मियों की मिलीभगत से कानपुर-सागर हाईवे के किनारे स्थित करोड़ों की 7 बीघा बेशकीमती जमीन अपने नाम दर्ज करा ली थी। ग्रामीणों की शिकायत पर डीएम और एसडीएम की सक्रियता के बाद प्रशासन ने इस धोखाधड़ी को पकड़ लिया है।
कैसे हुआ ‘करोड़ों का खेल’?
आरोपी राजेश साहू लंबे समय से तहसील के रिकॉर्ड रूम (अभिलेखागार) में निजी तौर पर काम कर रहा था। इसी का फायदा उठाते हुए उसने:
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तहसील कर्मियों से सांठगांठ कर कूट रचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार किए।
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कानपुर-सागर हाईवे किनारे की बेशकीमती जमीन को कई टुकड़ों (कहीं 10 बिस्वा, कहीं 1.5 बीघा) में अपने और अपनी पत्नी पूजा देवी के नाम खतौनी में दर्ज करा लिया।
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जालसाजी की हद तो तब हो गई जब आरोपी ने इस सरकारी जमीन को तीन अन्य लोगों को लाखों रुपये में बेच भी दिया।
ग्रामीणों की सजगता से खुला राज
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब जहांगीराबाद के ग्रामीणों (मो. अमीन, अच्छेलाल, विजय सिंह आदि) ने तहसील दिवस में कानपुर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह को शिकायती पत्र सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजेश साहू ने अधिकारियों के साथ मिलकर हाईवे किनारे की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा जमा लिया है।
प्रशासन की सर्जिकल स्ट्राइक
एसडीएम घाटमपुर अविचल प्रताप सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार अंकिता पाठक के नेतृत्व में जांच टीम गठित की। जांच रिपोर्ट में धोखाधड़ी की पुष्टि होते ही प्रशासन ने निम्नलिखित कार्रवाई की:
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नाम हटाया गया: राजस्व संहिता 2006 की धारा 38/5 के तहत मुकदमा दर्ज कर खतौनी से दंपति का नाम काटकर पुनः ‘सरकारी जमीन’ दर्ज किया गया।
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चेतावनी बोर्ड: शुक्रवार शाम को एसडीएम और तहसीलदार ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर जमीन को सुरक्षित किया और वहां चेतावनी बोर्ड लगा दिए।
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दोषियों पर शिकंजा: अब दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने वाले तहसील कर्मियों की पहचान की जा रही है।
“जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं होगा।”
— अविचल प्रताप सिंह, एसडीएम घाटमपुर
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